न्याय - शब्दांकन (डॉ० अजय जनमेजय)

बाजों के फिर मुंह लगा ,इक चिडिया का खून | लेकिन पूरे देश में ,जागा एक जुनून || फिर चिड़िया की ज़िन्दगी ,लूट ले गए बाज | पहरेदारों को म...
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न्याय - शब्दांकन (प्रो० चेतन)

कि सुखनवरों का खून क्यूँ कर ठण्डा हो गया है दर्द अंगड़ाई नहीं लेता ये क्या हो गया है ? क़त्ल या हो कोई बे-आबरू तुम्हें क्या मतलब ? ए ख...
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सियासी भंवर : भरत तिवारी

किस हद्द तक राजनीति ग्रसित लोगों के बीच आज का अवाम रह रहा है. हमें लगता रहा कि कद्दावर नेताओं से शुरू हो कर, बीच में धार्मिक आदि रास्तो...
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डॉ. रश्मि - दो लघुकथाएँ

चिड़ियाँ खुले आसमान में चिडियों का एक झुंड इठला रहा था. मस्ती में उड़ान भरती चिडियों के मन में उमंगें थीं कि, 'मैं उस आसमान क...
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मणिका मोहिनी की तीन बेहतरीन गज़लें

मणिका मोहिनी एक प्रसिद्ध कहानीकार और कवयित्री है । कविता-कहानी की 15 पुस्तकें प्रकाशित, कुछ वर्षों तक ' वैचारिकी संकलन ' हिन्दी...
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लेख: कहीं कुछ कमी सी है - प्रेम भारद्वाज

हे मिंग्वे ने लिखा है- ‘जीवन के बारे में लिखने के लिए जीवन को जीना जरूरी होता है.’  वर्तमान समय में जो रचनाएं आ रही हैं, वे जीवन के किस...
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