सोमवार, दिसंबर 31, 2012

न्याय - शब्दांकन (डॉ० अजय जनमेजय)

सोमवार, दिसंबर 31, 2012
बाजों के फिर मुंह लगा ,इक चिडिया का खून | लेकिन पूरे देश में ,जागा एक जुनून || फिर चिड़िया की ज़िन्दगी ,लूट ले गए बाज | पहरेदारों को म...

न्याय - शब्दांकन (प्रो० चेतन)

सोमवार, दिसंबर 31, 2012
कि सुखनवरों का खून क्यूँ कर ठण्डा हो गया है दर्द अंगड़ाई नहीं लेता ये क्या हो गया है ? क़त्ल या हो कोई बे-आबरू तुम्हें क्या मतलब ? ए ख...

शुक्रवार, दिसंबर 28, 2012

सियासी भंवर : भरत तिवारी

शुक्रवार, दिसंबर 28, 2012
किस हद्द तक राजनीति ग्रसित लोगों के बीच आज का अवाम रह रहा है. हमें लगता रहा कि कद्दावर नेताओं से शुरू हो कर, बीच में धार्मिक आदि रास्तो...

गुरुवार, दिसंबर 27, 2012

डॉ. रश्मि - दो लघुकथाएँ

गुरुवार, दिसंबर 27, 2012
चिड़ियाँ खुले आसमान में चिडियों का एक झुंड इठला रहा था. मस्ती में उड़ान भरती चिडियों के मन में उमंगें थीं कि, 'मैं उस आसमान क...

बुधवार, दिसंबर 26, 2012

मंगलवार, दिसंबर 25, 2012

सोमवार, दिसंबर 24, 2012

गूगलानुसार शब्दांकन