ना वे रथवान रहे.(एक गीति संवाद) - प्रेम शर्मा

ना वे रथवान रहे,                         ना वे                         बूढ़े प्रहरी, कहती टूट...
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तू न जिया न मरा ! - प्रेम शर्मा

तू न जिया न मरा,                        ज्यों कांटे                        पर मछली, प्राणों म...
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सुन भाई हर्गुनिया, निर्गुनिया फाग - प्रेम शर्मा

जल ही जल नहीं रहा,                      आग नहीं                      आग. सूरत बदले चेहरे,  ...
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पुलिया पर बैठा बूढ़ा - प्रेम शर्मा

पुलिया पर बैठा एक बूढ़ा काँधे पर मटमैला थैला, थैले में कुछ अटरम-सटरम आलू-प्याज हरी तरकारी...
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गन्धवाह-सा बौराया मन - प्रेम शर्मा

गन्धवाह-सा बौराया मन आहत स्वर उभरे। * विस्मृत्तियों  का गर्भ  चीरकर जन्मा सुधियों का मृगछौ...
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