शुक्रवार, दिसंबर 14, 2012

सुन भाई हर्गुनिया, निर्गुनिया फाग - प्रेम शर्मा

शुक्रवार, दिसंबर 14, 2012
जल ही जल नहीं रहा,                      आग नहीं                      आग. सूरत बदले चेहरे,                      सीरत बदला          ...

पुलिया पर बैठा बूढ़ा - प्रेम शर्मा

शुक्रवार, दिसंबर 14, 2012
पुलिया पर बैठा एक बूढ़ा काँधे पर मटमैला थैला, थैले में कुछ अटरम-सटरम आलू-प्याज हरी तरकारी कुछ कदली फल पानी की एक बोतल भी है म...

घोड़ों का अर्ज़ीनामा - प्रेम शर्मा

शुक्रवार, दिसंबर 14, 2012
हुज़ूरे आला, पेशे ख़िदमत है दरबारे आम में हमारा यह अर्जीनामा - कि हम थे कभी जंगल के आजाद बछेरे. किस्मत की मार कि एक दिन काफ़िले ...

गन्धवाह-सा बौराया मन - प्रेम शर्मा

शुक्रवार, दिसंबर 14, 2012
गन्धवाह-सा बौराया मन आहत स्वर उभरे। * विस्मृत्तियों  का गर्भ  चीरकर जन्मा सुधियों का मृगछौना ,                   ज्यों कुहरे से ...

बयाने बादाकश ! - प्रेम शर्मा

शुक्रवार, दिसंबर 14, 2012
इक दीदा-ए तर इक क़तरा-ए नम, इक हुस्ने-ज़मीं इक ख्वाबे-फ़लक इक जद्दोजहद इक हक़ मुस्तहक़ मेरी ज़िन्दगी मेरी ज़िन्दगी... मेरा इश्क़ ह...

सुन मेरे गीतों के पियवा - प्रेम शर्मा

शुक्रवार, दिसंबर 14, 2012
अमरलता प्यासी की प्यासी सूख चला है जीवन बिरवा,                        सुन मेरे गीतों जे पियवा! बुरी गंध द्वार तक आई रोम-रोम उमगी तरुण...

युग संध्या: एक शोक गीत - प्रेम शर्मा

शुक्रवार, दिसंबर 14, 2012
युग संध्या (एक शोक गीत) वही कुहाँसा,                      वही अँधेरा, वही दिशाहारा-सा जीवन,                      इतिहासों की      ...

हर चेहरा जलहीन नदी-सा - प्रेम शर्मा

शुक्रवार, दिसंबर 14, 2012
हर चेहरा जलहीन नदी-सा... (शताब्दी-बोध) इस रंगीन शहर में मुझको सब कुछ बेगाना लगता है ,                   आकर्षक                   चे...

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