सोमवार, दिसंबर 31, 2012

न्याय - शब्दांकन (डॉ० अजय जनमेजय)

सोमवार, दिसंबर 31, 2012
बाजों के फिर मुंह लगा ,इक चिडिया का खून | लेकिन पूरे देश में ,जागा एक जुनून || फिर चिड़िया की ज़िन्दगी ,लूट ले गए बाज | पहरेदारों को म...

न्याय - शब्दांकन (प्रो० चेतन)

सोमवार, दिसंबर 31, 2012
कि सुखनवरों का खून क्यूँ कर ठण्डा हो गया है दर्द अंगड़ाई नहीं लेता ये क्या हो गया है ? क़त्ल या हो कोई बे-आबरू तुम्हें क्या मतलब ? ए ख...

गूगलानुसार शब्दांकन