हैदराबाद , खुफिया तंत्र की नाकामी - जनसत्ता

    हैदराबाद में बीते गुरुवार को हुए धमाकों पर स्वाभाविक ही विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लिया और संसद के दोनों सदनों में खुफिया तंत्र की...
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चार कविता - रश्मि प्रभा

एक नाम से बढ़कर जीवन अनुभव होता है एक ही नाम तो कितनों के होते हैं नाम की सार्थकता सकारात्मक जीवन के मनोबल से होती है हवाओं का रूख जो ...
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कविता में कवि-मन दिखाई देना चाहिए- लीलाधर मंडलोई

     24 फरवरी, 2013, नयी दिल्ली - विनोद पाराशर      सिरीफोर्ट आडिटोरियम के नजदीक वरिष्ठ चित्रकार अर्पणा कौर की ’ एकेडमी आफ फाइन आर्ट एण्...
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शिशु और शव का मिटता फर्क - प्रेम भारद्वाज

शिशु और शव का मिटता फर्क      दोस्तोएवस्की ने कहा था कि अगली शताब्दी में नैतिकता जैसी कोई चीज नहीं होगी। गुलजार के सिनेमाई गीतों पर आध...
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आयोजन: बंगीय हिन्दी परिषद्‍ -स्थापना दिवस

     १५ फरवरी, कोलकाता     ‘निराला’, ‘सुकुल’ जयन्ती का आयोजन कोलकाता की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था बंगीय हिन्दी परिषद्‍ में वाणी के प्रा...
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सिनेमा के सौ साल की अनकथ कथा - डॉ. सुनीता

      सिनेमा के सौ साल पूरे होने की ख़ुशी में हो रहे आयोजनों में हिंदी पत्र पत्रिकाएं भी अपनी जिम्मेवारी से दूर नहीं हैं, हाँ कुछ पत्रिक...
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"वे हमें बदल रहे हैं..." राजेन्द्र यादव | बलवन्त कौर

     बीते दिनों राजधानी के प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में राजेन्द्र यादव जी के लेखों के नए संकलन है 'वे हमें बदल रहे ह...
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विश्वनाथ प्रसाद तिवारी बने साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष

नई दिल्ली, 18 फरवरी।    सुपरिचित कवि और आलोचक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को सोमवार को यहां सर्वसम्मति से साहित्य अकादेमी का अध्यक्ष चुना गय...
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लघुकथा: "चाबी का गुच्छा" - डॉ अनिता कपूर

"हेलो मैं मेघा बोल रही हूँ" "अरे तुम फोन पर क्यों बात कर रही? मैं तो घर के बाहर ही खड़ा हूँ" "पर मैं घर के भीतर...
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कवितायेँ - डॉ. अनिता कपूर

नहीं चाहिए अब तुम्हारे झूठे आश्वासन मेरे घर के आँगन में फूल नहीं खिला सकते चाँद नहीं उगा सकते मेरे घर की दीवार की ईंट भी नहीं बन स...
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चोका - डॉ. अनिता कपूर

चोका - 1 तुम्हारी याद की ओस में भीगी मैं या बादलों का पसीना भिगो गया रही मैं प्यासी तू बन जा नदिया हुई मैं रेत तेरा दिल फिसला ...
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किसी एक फिल्म का नाम दो - ओम थानवी

     ‘पथेर पांचाली’ (1955) से लेकर ‘आगंतुक’ (1991) तक सत्यजित राय ने पूरे छत्तीस वर्ष काम किया और छत्तीस फिल्में बनाईं. यानी हर साल एक फिल...
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