प्रतिवाद का जवाब - आशुतोष कुमार/ ओम थानवी

जनसत्ता संपादक श्री ओम थानवी के स्तम्भ ' अनंतर ' में अपने आंशिक जिक्र के प्रतिवाद में श्री आशुतोष कुमार ने एक लम्बा आलेख '...
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सौवीं गली का प्रवेश : दिलीप तेतरवे - कहानी (व्यंग्य)

साहब, मैं असत्यानंद किस्सागो हूं. अभी जो स्टोरी मैं आपको सुनाने जा रहा हूं, वह सौ प्रतिशत सच है. आप मुझ में विश्वास रखें और इस स्टोरी से...
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लघु कवितायें - शैलेन्द्र कुमार सिंह

शैलेन्द्र कुमार सिंह एम्.ए.पी-एच .डी(हिंदी ) हिंदी ,प्राध्यापक ,राजकीय वरिष्ठ माद्यमिक विद्यालय , बहोड़ा-कलां गुडगाँव (हरियाणा ...
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कवितायेँ: ट्रैफिक रेड सिग्नल - सुमन कुमारी

सुमन कुमारी बीएड, एम.ए, हिंदी जर्नलिज्म (डिप्लोमा ) विभिन्न कविता 'लोकसत्य अखबार' 'युध्दरत आम आदमी पत्रिका' 'सं...
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आप बहुत याद आए प्रसन्न दा - मज़कूर आलम

    आज मैं अपनी बात छह अंधे और एक हाथी की कहानी से शुरू करूंगा। तो कहानी यूं है- किसी गांव में 6 अंधे आदमी रहते थे। एक दिन उन्हें पता चला...
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मजरुह सुल्तानपुरी को याद करते - सुनील दत्ता

मजरुह सुल्तानपुरी 1 अक्टूबर 1919 − 24 मई 2000 चाक-ए-जिगर मुहताज-ए-रफ़ू है आज तो दामन सिर्फ़ लहू है एक मौसम था हम को रहा है शौक़-ए-...
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