दो कवितायेँ - वत्सला पाण्डेय

- - - १ - - -
गागर से सागर छलकाऊं
छोटी सी एक बात बताऊँ।।

ये पंछी क्या कुछ कहते है,
जब सूरज पश्चिम जाता है,
Hope, 1872 By Pierre Cécile Puvis de Chevannes French Symbolist artist born 14 December 1824 - died 24 October 1898
कहते है अब घर चलना है,
बच्चो से अपने मिलना है,
सपने बुनना है…

ये लहरे क्या कुछ कहती है,
जब नदिया बहती रहती है,
कहती है चलते रहना है,
सागर तक बढ़ते जाना है
मंजिल पाना है…

चन्दा तारे क्या कहते है,
जब रातो को खिल जाते है,
कहते है उजियार कराओ,
झिलमिल झिलमिल चमक फैलाओ,
तिमिर मिटाना है…

जीवन अपना क्या कहता है,
मानव को क्या समझाता है,
कहता है हंसते रहना है,
जीवन पथ को तय करना है,
खुशियाँ देना है…

- - - २ - - -
The Lovers By Pierre Auguste Renoir French, 1841-1919   भाषा व्याकरण
असमर्थ ही रहे
स्वर,
सरगम,
गीत
चुपचाप ही बहे
वर्ण
शब्द
संवाद
सारे प्रतिवाद
होते है अनकहे
सिर्फ तब
जब दिल तुम्हे
अपना कहे
सिर्फ अपना…
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4 comments :

  1. बेहतरीन अभिव्यक्ति !

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  2. भावों का सुन्दरतम प्रस्तुति करण लाजवाब है .......शुभाशीष

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    1. Wah bahut sundar.... apratim... keep it up vstsala ji

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  3. Wah bahut sundar.... apratim.... keep it up vatsala ji

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