मनोज कचंगल की कुछ कविताएँ

एक विचित्र चित्र  शब्दों को सँजोता संवेदनशील मन की लड़ियों में रेखाएँ काढ़ता तूलिका साधता रंगों को करता संयोजित बना देता अनायास ही ...
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मनोज कचंगल की कला : कुमार अनुपम

विदग्ध रंगमय आकाश में एक सलेटी चन्द्रमा मनोज कचंगल की कला में उपस्थित जिस तत्त्व ने मुझे शुरू से आकर्षित किया, वह है - विनम्र सादगी। ...
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कहानी: पेंशन का रिश्ता - अमिय ‘बिन्दु’

पेंशन का रिश्ता                   -अमिय बिन्दु दीपू की चीख सुनकर किरन की अचानक नींद खुल गई। समझ नहीं पाई, यह कोई सपना था या हकीकत। अधख...
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अमर नहीं यह प्यार: कहानी - राजेन्द्र राव

जिस बंदे ने मेरा जीना-मरना एक कर दिया है उसका नाम है, रवि। जी हां रवि, मगर मैं उसे रवी कह कर पुकारती हूं, छोड़िए मेरा क्या, मैं तो उसे जाने...
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आनर किल्लिंग - अरविन्द जैन

आनर किल्लिंग: शादी की आज़ादी  अगर न्याय के पहरेदारों और कानून के बीच टकराहट होती रहेगी, तो जाति और धर्म के सांकल में जकड़ी शादियां आजाद ...
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