कविताये नज़में - गीतिका 'वेदिका'

बेहिसाब बारिश आजाओ न कभी यूँ ही शत बार प्राण पुकारते मेरा द्वार छोड़ के कि तेरे दिल कि सदा फिर याद आई खुद को खूं में तर बतर कर दू...
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