आप बहुत याद आए प्रसन्न दा - मज़कूर आलम

    आज मैं अपनी बात छह अंधे और एक हाथी की कहानी से शुरू करूंगा। तो कहानी यूं है- किसी गांव में 6 अंधे आदमी रहते थे। एक दिन उन्हें पता चला...
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मजरुह सुल्तानपुरी को याद करते - सुनील दत्ता

मजरुह सुल्तानपुरी 1 अक्टूबर 1919 − 24 मई 2000 चाक-ए-जिगर मुहताज-ए-रफ़ू है आज तो दामन सिर्फ़ लहू है एक मौसम था हम को रहा है शौक़-ए-...
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