कवितायेँ - रविश ‘रवि’

चाँद की बेचैनी ! चाँद में है बेचैनी और तारों में भी है कुछ सुगबुगाहट सी बस कुछ और पल और आ जायेगा सूरज उनकी रोशनी का सौदा करने...
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