कवितायेँ - ऐन सूरज की नाक के नीचे : सुमन केसरी

उसके मन में उतरना...  उसके मन में उतरना मानो कुएँ में उतरना था सीलन भरी अंधेरी सुरंग में      उसने बड़े निर्विकार ढंग से      अं...
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दो गज़लें - मूसा खान अशांत

अब  तो  लगता  है  इस  तरह से  जीना होगा प्यास  लगने  पे  लहू  अपना  ही  पीना  होगा किसको फुर्सत है की ग़म बाँट ले गैरों का यहाँ ...
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