सोमवार, जुलाई 15, 2013

कवितायेँ - ऐन सूरज की नाक के नीचे : सुमन केसरी

सोमवार, जुलाई 15, 2013
उसके मन में उतरना...  उसके मन में उतरना मानो कुएँ में उतरना था सीलन भरी अंधेरी सुरंग में      उसने बड़े निर्विकार ढंग से      अं...

दो गज़लें - मूसा खान अशांत

सोमवार, जुलाई 15, 2013
अब  तो  लगता  है  इस  तरह से  जीना होगा प्यास  लगने  पे  लहू  अपना  ही  पीना  होगा किसको फुर्सत है की ग़म बाँट ले गैरों का यहाँ ...

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