बुधवार, सितंबर 11, 2013

ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل

बुधवार, सितंबर 11, 2013
ह० अमीर खुसरो के लेखन शैली की एक अतिउत्कृष्ट ग़ज़ल है "जिहाले मिस्किन", जिसमे फारसी और हिंदी दोनों का एक साथ प्रयोग करते हुए, वो अ...

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