सोमवार, सितंबर 30, 2013

मनोज कचंगल की कुछ कविताएँ

सोमवार, सितंबर 30, 2013
एक विचित्र चित्र  शब्दों को सँजोता संवेदनशील मन की लड़ियों में रेखाएँ काढ़ता तूलिका साधता रंगों को करता संयोजित बना देता अनायास ही ...

मनोज कचंगल की कला : कुमार अनुपम

सोमवार, सितंबर 30, 2013
विदग्ध रंगमय आकाश में एक सलेटी चन्द्रमा मनोज कचंगल की कला में उपस्थित जिस तत्त्व ने मुझे शुरू से आकर्षित किया, वह है - विनम्र सादगी। ...

गूगलानुसार शब्दांकन

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