गुरुवार, नवंबर 14, 2013

संजय पाल, सुमन केशरी की 'मोनालिसा की आँखे' निहारने के बाद | Sanjay Pal on Suman Keshari's 'Mona Lisa Ki Aankhen'

गुरुवार, नवंबर 14, 2013
कल रात्रि एक बहुत ही सजीव स्वप्न देखा। स्वप्न के दो छोर थे। एक तरफ शब्द था, दूसरी तरफ भी शब्द ही था। दूर कहीं रेगिस्तान के बीचोबीच दौड़ती...

गूगलानुसार शब्दांकन

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