अवसान एक युग पुरुष का - अशोक मिश्र | Ashok Mishra on #RajendraYadav Rajendra Yadav

अवसान एक युग पुरुष का  अशोक मिश्र  सुबह की पौ फूटते ही जैसे ही मोबाइल फोन को उठाया वैसे ही स्क्रीन पर कई मिस्ड काल और इनबाक्स में मैसेज...
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गुलज़ार: 1857 | #Gulzar : 1857

1857 गुलज़ार एक ख़्याल था...इन्क़लाब का इक जज़बा था सन अठारह सौ सत्तावन!! एक घुटन थी, दर्द था वो, अंगारा था, जो फूटा था डेढ़ सौ साल ...
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