मंगलवार, दिसंबर 17, 2013

संसद का बदलता स्वरूप - श्वेता यादव | Changing Nature of Parliament - Sweta Yadav

मंगलवार, दिसंबर 17, 2013
संसद का बदलता स्वरूप: बहस के प्रति उदासीनता  श्वेता यादव  “किसी कार्यशील एवं जीवंत लोकतान्त्रिक समाज में सूखा पड़ सकता है, पर दुर्भिक्...

मदन कश्यप - पुरखों का दुख | Poety - Purkhon ka dard : Madan Kashyap

मंगलवार, दिसंबर 17, 2013
पुरखों का दुख मदन कश्यप दादा की एक पेटी प़डी थी टीन की उसमें ढेर सारे का़ग़जात के बीच ज़डी वाली एक टोपी भी थी ज़र-ज़मीन के दस्तावेज़...

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