शुक्रवार, फ़रवरी 21, 2014

राकेश कुमार सिंह की कविता "पत्थर भी पहचान लिया करती थी" Poetry: Rakesh Kumar Singh

शुक्रवार, फ़रवरी 21, 2014
राकेश कुमार सिंह की कविता "पत्थर भी पहचान लिया करती थी" ऐ समन्दर, सुनो, एक बात सुनो सोच रहा हूं बहुत लिपटे हैं तुमसे मैं...

गूगलानुसार शब्दांकन

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