गुरुवार, सितंबर 25, 2014

तीन ग़ज़लें- एक बह्र - प्राण शर्मा | Pran Sharma's 3 New Ghazals in the same meter

गुरुवार, सितंबर 25, 2014
तीन ग़ज़लें- एक  बह्र  प्राण शर्मा 1 कानों  में रस  सा  घोलती रहती  हैं बेटियाँ मुरली  की  तान  जैसी  सुरीली  हैं  बेटियाँ क्योंकर न...

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