शनिवार, दिसंबर 06, 2014

कवितायेँ: स्वप्निल श्रीवास्तव (hindi kavita sangrah)

शनिवार, दिसंबर 06, 2014
कवितायेँ: स्वप्निल श्रीवास्तव ♒ बांसुरी मैं बांस का टुकड़ा था तुमने यातना देकर मुझे बांसुरी बनाया मैं तुम्हारे आनंद के लिये बज...

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