'वर्तमान साहित्य' जुलाई , 2015 | 'Vartman Sahitya', July 2015


'वर्तमान साहित्य'  जुलाई, 2015

साहित्य, कला और सोच की पत्रिका



वर्ष 32 अंक 7  जुलाई, 2015
सलाहकार संपादक: रवीन्द्र कालिया
संपादक: विभूति नारायण राय
कार्यकारी संपादक: भारत भारद्वाज
कला पक्ष: भरत तिवारी
-----------------------------
कबिरा हम सबकी कहैं / विभूति नारायण राय

आलेख
लाला हरदयाल : सशस्त्र प्रतिरोध के दार्शनिक की ऐतिहासिक उपस्थिति / प्रो० प्रदीप सक्सेना
साहित्य से निर्वासन अर्थात् साहित्य का समाजशास्त्रीय अध्ययन / धर्मवीर यादव ‘गगन’

धारावाहिक उपन्यास–2
कल्चर वल्चर / ममता कालिया

अनुवाद (उर्दू कहानी)
तितलियाँ ढूँढ़ने वाली / ज़ाहिदा हिना

अनूदित कविताएं (मलयालम)
सुकन्या | अशरफ कल्लौड़ | पी० के० गोपी | जयलक्ष्मी | बी० टी० जयदेवन

कहानी
ज़हरबाद / इंदिरा दाँगी
दूसरी पारी / ए० असफल
लो बजट / प्रज्ञा
परिणाम / नीरजा पाण्डेय
वापसी / रवि किरण सचदेव

कविताएं
शैलेन्द्र शैल

मीडिया
क्या सचमुच इतना शक्तिशाली है फ़ेसबुक ? / प्रांजल धर

समीक्षा
ख्वाब की सुनहरी डोर में गुथे आशंकाओं के काले पोत / श्रुति सुधा आर्या
भारतीय गाँवों की बदहाली का आख्यान / उमेश चैहान
नागार्जुन का काव्य विवेक / कमलानंद झा




वर्तमान साहित्य जुलाई २०१५ अंक को अलग से खोलें
सदस्यता प्रपत्र डाउनलोड subscription form
सदस्यता प्रपत्र डाउनलोड करें

००००००००००००००००
Share on Google +
    Facebook Commment
    Blogger Comment

0 comments :

Post a Comment

osr5366