कहानी: कसाईखाना ~ अमित बृज | Kahani : Kasaikhana - Amir Brij

कसाईखाना अमित बृज सीन-1   “भैया मुसलमानी है।”   “पकड़ पकड़। इधर ला साली को। अन्दर ले चल इसे।“   (थोड़ी देर बाद) “अब एक काम कर, त...
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"एक शोफिसटिकेटड डस्टबिन" ... कवितायेँ : मुकेश कुमार सिन्हा | Poems : Mukesh Kumar Sinha (hindi kavita sangrah)

कवितायेँ  ~मुकेश कुमार सिन्हा  सिमरिया पुल  जब भी जाता हूँ गाँव तो गुजरता हूँ, विशालकाय लोहे के पुल से सरकारी नाम है राजेन...
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