पत्रकारिता समाज से निकलती है कार्पोरेट से नहीं — पी साइनाथ


P Sainath D. S. Borker Lecture Series Photo Bharat Tiwari
Palagummi Sainath is an Indian journalist and photojournalist who focuses on social & economic inequality, rural affairs, poverty and the aftermath of globalization in India. He is the founding editor of the People's Archive of Rural India. Photo (c) Bharat Tiwari




P Sainath in D. S. Borker Lecture Series on 

“My Vision of India: 2047 A.D.”


18वें डी एस बोरकर मेमोरियल लेक्चर "2047 ई०पू० : मेरी दृष्टि का भारत” (The D. S. Borker Lecture Series on “My Vision of India: 2047 A.D.”) – में बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार और रमन मैगसेसे पुरस्कार (Ramon Magsaysay Award) सम्मानित पी साइनाथ ने कहा कि आज के समय में पत्रकारिता की जगह विषयों का उत्पादन यानी 'कंटेंट जनरेशन' हो रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समाज और समुदाय से निकलती है न कि कारपोरेट से। गाँधी को उत्कृष्ट पत्रकार बताते हुए उन्होंने लोगों को "गाँधी का ताबीज़" याद दिलाया जिसमें गाँधी ने कहा था - जब भी दुविधा में हो या जब अपना स्वार्थ तुम पर हावी हो जाए, तो इसका प्रयोग करो। उस सबसे गरीब और दुर्बल व्यक्ति का चेहरा याद करो जिसे तुमने कभी देखा हो, और अपने आप से पूछो- “जो कदम मैं उठाने जा रहा हूँ, वह क्‍या उस गरीब के कोई काम आएगा? क्या उसे इस कदम से कोई लाभ होगा? क्या इससे उसे अपने जीवन और अपनी नियति पर कोई काबू फिर मिलेगा? दूसरे शब्‍दों में, क्या यह कदम लाखों भूखों और आध्‍यात्मिक दरिद्रों को स्‍वराज देगा?तब तुम पाओगे कि तुम्हारी सारी शंकाएं और स्वार्थ पिघल कर खत्म हो गए हैं.”

मीडिया की ज्यादातर ख़बरों से ग्रामीण भारत गायब ही रहता है बल्कि अब तो मीडिया ने शहरी भारत को भी दिखाना बंद कर दिया है

ख़बरों का आकलन लाइक्स और हिट्स के आधार पर करने वाली मीडिया के स्वरूप पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया की ज्यादातर ख़बरों से ग्रामीण भारत गायब ही रहता है बल्कि अब तो मीडिया ने शहरी भारत को भी दिखाना बंद कर दिया है। सेंटर ऑफ़ मीडिया स्टडीज की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया - पिछले एक सालों में मीडिया की 66% ख़बरों का केन्द्र नई दिल्ली रहा है। उन्होंने कहा कि शेयर मार्किट की वजह से मुंबई और सूचना एवं तकनीक की वजह से बैंगलोर जैसे शहर ख़बरों में कुछ जगह पा जाते हैं।




अपने लेक्चर की शुरूआत में ही साइनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि 2047 का भारत कैसा होगा, इससे पहले हमें तय करना पड़ेगा कि 2017 में भारत कैसा हो। उन्होंने कहा कि समानता और न्याय लोगो के लिए प्रमुख हैं। भारतीय संविधान की प्रस्तावना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रस्तावना में न्याय शब्द को प्रमुखता से लिखा गया है। हमें इस ओर ध्यान देना चाहिए। साइनाथ ने कहा कि यह बहुत ही शर्मनाक है कि मैला ढोने जैसी अमानवीय व्यवस्था आज भी भारत में मौजूद है, कि भारत में आज भी लगभग तीन लाख लोग सर पर रखकर मैला ढोने के लिए अभिशप्त हैं। सरकार अगर चाहे तो मात्र 9000 करोड़ रूपये खर्च करके इन्हें इस स्थिति से निकाल सकती है।

गुजरात के उना कि घटना दमन के खिलाफ एक संघर्ष है। यह दमन सालों से उस समाज में व्याप्त था और अब लोगों ने इसका प्रतिरोध करना शुरू किया है।

किसान आत्महत्या पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारों का काम आंकड़ों में फेरबदल करना ही रह गया न कि किसानों की स्थिति को सुधारना। साइनाथ ने कहा कि यह अपने आप में एक अजूबा ही है कि इस साल भारत के पंद्रह राज्यों ने किसान आत्महत्या की संख्या को शून्य दिखाया है। आर्थिक असमानता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के मुकाबले भारत में आर्थिक असमानता बहुत तेजी से बढ़ी है। जहाँ दुनिया कि आधी दौलत 62 लोगों के पास है... वही भारत की आधी दौलत देश के 15 लोगों के पास है... और भारत की कुल संपत्ति के 69% पर देश के 100 अमीरों कब्ज़ा है।

साइनाथ कहा कि मेरी दृष्टि में 2047 का भारत ऐसा हो जहाँ समानता और न्याय से लोग जी रहे हों। कोई भूखा पेट न सोए। हर किसी को बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी हो। गरीबी समाप्त हो। उन्होंने कहा कि गुजरात के उना कि घटना दमन के खिलाफ एक संघर्ष है। यह दमन सालों से उस समाज में व्याप्त था और अब लोगों ने इसका प्रतिरोध करना शुरू किया है।

लेक्चर के आखिरी में उन्होंने फ्रांसीसी लेखक विक्टर ह्युगो की एक लाइन बोलते हुए कहा कि " विश्व की समस्त सेनाओं से शक्तिशाली वह विचार होता है जिसका “समय” आ गया हो।"

इस लेक्चर (आख्यान) का आयोजन 1999 से हर साल डी एस बोरकर की याद में किया जाता है जो कि एक प्रशासनिक अधिकारी थे। इस कार्यक्रम में अर्थशास्त्री प्रोफेसर ए के शिवकुमार और राजनीतिक विश्लेषक सुकुमार मुरलीधरन भी मौजूद थे। कार्यक्रम का आयोजन बुधवार 24 अगस्त को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के देशमुख आडिटोरियम में किया गया था।

धीरज मिश्रा
M.A convergent Journalism
Jamia Millia Islamia
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1 comments :

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (27-08-2016) को "नाम कृष्ण का" (चर्चा अंक-2447) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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