रविवार, दिसंबर 25, 2016

असगर वजाहत हमारे समय के मंटो है — भरत तिवारी #DilliBol 1



Dilliबोल १

ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर, कनॉट प्लेस में शुक्रवार की शाम अभूतपूर्व समा रहा।
Audience
बहुत भारी संख्या में लोग, जिनमें ज्यादातर युवा थे, असगर वजाहत (Asghar Wajahat) की कहानियों के, रौनक (Rj Raunac) और शिल्पी (Shilpi Marwaha) द्वारा किये जाने वाले ड्रामेटाइज्ड-पाठ को सुनने पहुंचे थे।
Audience
न सिर्फ पूरा हॉल भरा हुआ था बल्कि हॉल के बाहर भी लोग खड़े थे।
Asghar Wajahat
असगर वजाहत हमारे समय के मंटो है या ऐसे कहूं कि मंटो से भी आगे हैं,
RJ Raunac
उनकी कहानियों में, हमारे समय की वे संवेदनाएं, जो हमारे काले सच को दिखाती हैं, दर्ज है और
Shilpi Marwaha, Arvind Gaur, Richa Aniruddha
उन समवेदनाओं से — ऑक्सफ़ोर्ड बुकस्टोर (Oxford Bookstore Connaught Place) और शब्दांकन Shabdankan के कार्यक्रम ‘दिल्लीबोल’ में — रेडिओ के सितारे आरजे रौनक ‘बउवा’ और थिएटर की दिग्गज शिल्पी मारवाह, ने अपनी ख़ूबसूरत आवाज़ और अदायगी से पूरा न्याय दिया।
Shilpi Marwaha
वहां मौजूद श्रोताओं का कहानी के नाट्य रूप को सुनते वक्त बिल्कुल सन्नाटा कर देना और फिर तालियों से हॉल को भर देना यही दिखा रहा था।
Arvind Gaur
दिल्लीबोल से मेरी यही कोशिश रहेगी कि हिंदुस्तानी साहित्य और उससे जुड़ी गतिविधियों को, शब्दांकन की तरह ही, लोगों तक पहुंचा सकूं।
Bharat Tiwari
शुरूआत अच्छी हुई है और भरोसा है हर महीने कुछ ना कुछ अच्छा होता रहेगा।
Neeta Sreedharan, RJ Raunac, Shilpi Marwaha, Asghar Wajahat, Bharat Tiwari
ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर, कनॉट प्लेस , साहित्य और कला के लिए जो गतिविधियां लगातार किए जा रहा है उससे वह निश्चय ही दिल्ली के किताब प्रेमियों, कला प्रेमियों को दुर्लभ सांस्कृतिक ऑक्सीजन दे रहा है।

#दिल्लीबोल सह-आयोजक भरत तिवारी (शब्दांकन)
#DilliBol #AsgharWajahat



(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
००००००००००००००००


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

गूगलानुसार शब्दांकन