रवीन्द्र कालिया — जिंदादिल और दिलदार — मृदुला गर्ग

Lively and generous Ravindra Kalia — Mridula Garg "सांप कब सोते हैं?"  कालिय...
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कविता — देशद्रोह — प्रेमा झा | Sedition — Poem

देशद्रोह  — प्रेमा झा देशद्रोह बच्चे देशद्रोही हैं सड़क, गली, मुहल्लें और गैर-मुल्क...
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अनन्त प्रकाश नारायण — हम आपसे किसी भी रहम की उम्मीद नहीं करते हैं #JNURow

Try to attack us as strongly as possible, we will hit back —  Anant Prakash Narayan to HR...
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