सारा शगुफ्ता का कांटेदार पैरहन : अमृता प्रीतम की जुबानी — देवी नागरानी

ज़मीन की पगडंडियों पर चलते चलते इंसान जब लहूलुहान होता है, तब आयतें लिखीं जाती हैं। दर्द जब कतरा कतरा रिसने लगता है तो कलम से शब्द नहीं ...
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कह दो तुम — प्रेमा झा की कवितायेँ

कवितायेँ  प्रेमा झा कह दो तुम तुम जो कह देते तो चाँद तक अड़गनी टांग देती दुपट्टा सितारों वाला डालकर उस पर तुम्हे...
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महिलाएं और वर्तमान भारतीय राजनीति — ऋचा पांडे मिश्रा

हम भारतीय परिवार चिमटे से पैसे को पकड़ते है और राजनीति में पैसा नहीं बल्कि समय निवेश करना पड़ता है और ऐसे में जब निवेशक एक महिला हो तो पा...
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