रविवार, अक्तूबर 16, 2016

सारा शगुफ्ता का कांटेदार पैरहन : अमृता प्रीतम की जुबानी — देवी नागरानी

रविवार, अक्तूबर 16, 2016
ज़मीन की पगडंडियों पर चलते चलते इंसान जब लहूलुहान होता है, तब आयतें लिखीं जाती हैं। दर्द जब कतरा कतरा रिसने लगता है तो कलम से शब्द नहीं ...

महिलाएं और वर्तमान भारतीय राजनीति — ऋचा पांडे मिश्रा

रविवार, अक्तूबर 16, 2016
हम भारतीय परिवार चिमटे से पैसे को पकड़ते है और राजनीति में पैसा नहीं बल्कि समय निवेश करना पड़ता है और ऐसे में जब निवेशक एक महिला हो तो पा...

गूगलानुसार शब्दांकन

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