रविवार, मई 21, 2017

जंगलराज? #अब_शहर_ही_जंगल_है ! #AbhisarSharmaBlog


किस बात का जंगलराज? कैसा भीड़तंत्र? सब सही चल रहा है। All is well! 

— अभिसार शर्मा



7 लोग मार दिए गए। बीजेपी-शासित झारखंड में। शक के आधार पर। व्हाट्सएप पर एक अफवाह के आधार पर। आरोप था बच्चा चोरी का। बच्चे चोरी ही नही हुए और 7 घरों के चिराग तुमने बुझा दिए!


रोहतक का गैंगरेप याद है ना? मै नहीं भूल पा रहा हूं। पीड़ित की खाने की नली शरीर से बाहर निकाल दी थी। ये भी बीजेपी-शासित राज्य है। दो दिन पहले गुरूग्राम में लूट हुई थी! यहां भी जंगलराज कैसे हो सकता है।

बीजेपी शासित यूपी में 15 मार्च से 15 अप्रैल के बीच 179 बलात्कार हो चुके हैं। ये योगी का जंगल है! उखाड़ लोगे कुछ। है दम जंगलराज बोलने का?

20 डकैतियां, 273 लूट की घटनाएं, 240 हत्याएं और 179 बलात्कार। जी हां 179 बलात्कार। एक महीने में।

ये जंगलराज कैसे हो सकता है? क्यों? ये तो संपूर्ण-शांतिकाल से पहले की छोटीमोटी कुर्बानियां हैं, अब ये तो आपको को देनी होंगी।
गलती से मुसलमान समझे गए — अभिसार शर्मा 

वो सरकार जो राज्य और केन्द्र में औरत के सम्मान को मुद्दा बना कर सत्ता में आई थी, ये हालात उनके शासन में? अब ये न कहियेगा कि सरकार को संभलने में वक्त लगता है। शासन को समझने में वक्त लगता है। केन्द्र में मोदी सरकार की तरह इस सरकार के पास भी वही ब्रह्मास्त्र है। पुरानी सरकारों पर इसका ठीकरा फोड़ देना। याद है यूपी विधानसभा में मुख्यमंत्रीजी का ये बयान —

"आदतें कुछ खराब हो चुकी हैं, 12-15 वर्षों की आदतें आसानी से छूटने वाली नहीं है, वो छूटने में कुछ समय लग रहा है इसलिए कहीं न कहीं हरकतें दिखाने का प्रयास कर रही हैं।"!!

पूर्ण अशांत राष्ट्र — साध्वी खोसला

तो चलिए खराब आदतों की फेहरिस्त पर निगाह डाली जाए —

1. सहारनपुर में अराजकता, जिसका आगाज़ होता है बीजेपी सांसद द्वारा मुसलिम इलाके से अंबेडकर यात्रा निकालते हुए, जिसकी अनुमति नही थी, जिसका नतीजा — पुलिस अधिकारी के घर पर हमला। खुद बीजेपी सांसद के कर कमलों द्वारा हमले को अंजाम दिया गया। पुलिस अधिकारी ट्रांसफर!

2. सहारनपुर में फिर हिंसा। दलितों और ठाकुरों में तनाव। एक अगड़ी जाति के व्यक्ति की मौत, दलितों पर हमला। पुलिस हाथ पर हाथ रखकर बैठी रहती...मानो ठाकुरों को भड़ास निकालने की छूट दे रही हो।

3. अलीगढ़ में दंगे। एक मस्जिद के गुंबद पर विवाद, बीजेपी विधायक संजीव राजा आग में घी डालने का काम करते हैं। कहते हैं पूरी मस्जिद ही विवादास्पद है।

4. आगरा में बीजेपी विधायक उदयभान सिंह की नुमाइंदगी में बजरंग-दल, हिंदू-युवावाहिनी के शूरवीरों ने डीएसपी की पिटाई कर दी ।

5. मथुरा में सर्राफा बाज़ारियों की हत्या। वो भी कैमरे में कैद है। कैसे भूलोगे?

अरे? अब तो सरकार तुम्हारी है। किस बात का गुस्सा है फिर? क्या साबित करना चाहते हो? 

ये जंगलराज कैसे हो सकता है? क्यों? ये तो संपूर्ण-शांतिकाल से पहले की छोटीमोटी कुर्बानियां हैं, अब ये तो आपको को देनी होंगी।




यूपी में जो हो रहा है, उसमें दो चीज़ें समान हैं। पहली, कि पुलिस या तो पिटी या हमलावरों के सामने बेबस / मददगार दिखी। दूसरी ये कि भीड़ को लीड अक्सर बीजेपी नेताओं ने किया। अरे? अब तो सरकार तुम्हारी है। किस बात का गुस्सा है फिर? क्या साबित करना चाहते हो? पुलिस तक डरी हुई है। हतोत्साहित है। याद है चारू निगम की रोती हुई वो तस्वीरें। जिसकी आंखों में आंसू एक विधायक की बद्तमीज़ी का नतीजा थे? तो क्या अंतर है समाजवादी पार्टी के शासन और योगी राज में? वहां थानों में सपाईयों का जलवा था यहाँ...

अब सवाल ये कि क्या झारखंड की घटना और यूपी में नेताओं द्वारा भीड़ की नुमाइंदगी करना, उकसाना...इसमें कोई संबंध है क्या? क्या ऐसी सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है कि भीड़ अपना कानून खुद लिखे? भड़काना, उकसाना, अफवाह फैलाना, भला ये कैसी सियासी पार्टी की सोच का हिस्सा हो सकती है?

और सबसे दुखद बात, सत्तारूढ़ दलों का मुद्दे को मानने से भी मना कर देना। मीडिया और जनता का खामोशी अख्तियार कर लेना। चुप हो जाना। बिल्कुल चुप।

हम अंदर से मर चुके हैं। हम एक शख्स की भक्ति में इस कदर लीन हैं, इस कदर...कि हमने हकीकत देखने से इंकार कर दिया है। हम सोचते हैं कि देश के कुछ लोग नर्क में जलते रहेंगे और वो आग हम तक कभी नहीं पहुंचेगी। हम अछूते रहेंगे, लिहाज़ा हम आवाज़ नही उठाएंगे। ठीक है एक मरे हुए समाज से एक राष्ट्र क्या और क्यों कोई उम्मीद रखे ! नहीं ?

मुसलमान - मीडिया का नया बकरा ― अभिसार शर्मा

Abhisar Sharma
Journalist , ABP News, Author, A hundred lives for you, Edge of the machete and Eye of the Predator. Winner of the Ramnath Goenka Indian Express award.

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
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