बुधवार, अगस्त 16, 2017

राजस्थान अंतर्राष्ट्रीय लोक उत्सव Jodhpur Riff 5-9 October 2017





मेहरानगढ़ दुर्ग में एक बार फिर गुंजेगी भारत व विश्वभर के संगीत के स्वर लहरियां 

नई दिल्ली, 16, अगस्त 2017 : शरद पूर्णिमा के चांद की चांदनी जो की इस समय वर्ष में सबसे प्रखर होती है, और इस चाँदनी छटा में जोधपुर का ऐतिहासिक मेहरानगढ़ दुर्ग एक बार फिर से दमक उठेगा जब वहां 5 से 9 अक्टूबर, के बीच होने वाले राजस्थान अंतर्राष्ट्रीय लोक उत्सव जोधपुर रिफ 2017 के तहत भारत व विश्व भर से आये संगीतकार अपने सुरों का जादू बिखेरेंगे। दिल को छू जाने वाले संगीत और अपने खुशनुमा माहौल के लिए प्रसिद्ध रिफ में जब राजस्थानी लोकसंगीत के साथ विश्व भर की कई संगीत शैलियों की स्वर लहरियां गूंजेंगी तो एक अद्भुत ही समा बंधेगा। 


पिछले 10 वर्षों से, जोधपुर रिफ कलाकारों और संगीत प्रेमियों के मन को लुभाता आ रहा है। राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर के अनूठे और आकर्षक वातावरण के बीच, मेहरानगढ़ किले में बहुत ही अनोखे रुप में यह उत्सव आयोजित होता है। यहां आयोजित आकर्षक कार्यक्रमों और बहुत ही खास तौर पर की गई व्यस्थायों के चलते लोग इस कार्यक्रम में बार-बार आना पसंद करते हैं।

प्रातःकाल के शांतिपूर्ण आध्यात्मिक संगीत सत्रों से लेकर देर रात्रि तक चलने वाले नृत्य व संगीत के कार्यक्रम लोगों के मन को संगीतमयी कर देते हैं। यह एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच है, जहां परंपरागत लोकसंगीत की प्रस्तुतियां एक नवीन अनुभव प्रदान करती हैं। इस उत्सव में लगभग 350 राजस्थानी व अंतरराष्ट्रीय संगीतकार भाग लेंगे।



जोधपुर रिफ दुर्लभ राजस्थानी और अंतरराष्ट्रीय कलाओ का लुत्फ उठाने का एक शानदार अवसर है, जहां महान कलाकारों से मिलने और बातचीत करने के अवसर के साथ-साथ, युवा पीढ़ी को हमारी समृद्ध विरासत से रूबरू होने का मौका भी मिलता है।

जोधपुर रिफ -2017 की घोषणा करते हुए, मुख्य संरक्षक तथा मारवाड़ जोधपुर के महामहिम महाराजा गजसिंह -2 का कहना है कि, “राजस्थानी लोक संगीतकार जोधपुर रिफ के प्रमुख आकर्षण हैं। उनकी लोकसंगीत परंपराओं को लोग पसंद करते हैं और उन्हें यहां उच्च गुणवत्ता वाले अंतरराष्ट्रीय मंच का पूरा लाभ मिलता है। इसके अलावा, हम उनकी कला को भारत और दुनिया भर के कई उत्सवों में पेश करने का प्रयास भी करते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि जोधपुर रिफ को भारत में संगीत के लिए एक अग्रणी और अतिप्रिय उत्सव के रूप में जाना जाता है। ”

जोधपुर रिफ संगीत प्रेमियो के लिए क्रार्यक्रमों की एक लम्बी श्रृंखला प्रस्तुत करता है, जिसमें उल्लेखनीय है…

प्रातःकालीन सत्र : सुबह के शांत माहौल और जसवंत थाडा की जादुई छटा में आयोजित दिल को छू जाने वाली संगीत की प्रस्तुतियां।

राव जोधा पार्क का डेजर्ट लाउंजः सिर्फ शरद पुनम के पूरे चांद की रोशनी में मध्यरात्रि को प्रारम्भ होकर सुबह तड़के तक चलने वाला संगीत कार्यक्रम, यहां राजस्थान के लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां बिना किसी साउण्ड सिस्टम के होती है व चांद की प्राकृतिक रोशनी के अलावा यहां और कोई रोशनी नही होती।



रिफ रसल (RIFF Rustle) : कलाकारों की एक ऐसी जुगलबन्दी जिसमें सभी कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति, जिसमे कलाकार कभी जोड़ी तो कभी समूह में जुगलबन्दी करते है। खास बात ये है कि इस प्रस्तुति की कलाकार कोइ पुर्व तैयारी नही करते फेस्टीवल हर साल किसी एक कलाकार को रसलर (Rustler) नियुक्त करता है और वो ही इस कार्यक्रम के लिए कलाकार चुनता है। कलाओ और कलाकारों का ये शानदार मिलन दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर देता है।

वार्तालाप के सत्रः इन सत्रों मे कलाकारों से मिलने-जुलने और बातचीत करने के अलावा राजस्थान की कुछ दुर्लभ लोक कलाओं को खास विशेषज्ञों द्वारा करीबी से समझने का अवसर मिलता है।

जोधपुर रिफ के निदेशक दिव्य भाटिया ने कहा, “हालाँकि हम नियमित रूप से इस उत्सव में नये तत्व जोड़ते रहते हैं, परंतु राजस्थान के संगीतकारों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और दुनिया के कुछ बेहतरीन संगीत प्रतिभाओं को पेश करना हमारे लिए महत्वपूर्ण है। हमारा यथासंभव प्रयास यही रहता है कि क्षेत्रीय कलाकारों को अधिक से अधिक अवसर दें, ताकि उन्हें यहां अपनी धरती पर और विदेशी ज़मीन पर, दोनों ही जगह एक जैसा सम्मान और पहचान मिले। हर बार की तरह इस वर्ष भी यह उत्सव भव्य और शानदार होगा। ”


मुख्य 

राजस्थान के लोक संगीतकार

निहाल खान: एक पारंपरिक मांगणियार लोक संगीतकार, जिन्हें पारम्परिक गायन शैली जांगडा महारत हासिल है।

बाबूनाथ जोगीः बाबूनाथ जोगी समुदाय से हैं, जो अपने क्षे़त्र मे जोगी समुदाय के पारम्परिक शैली के अकेले गायक हैं, वे शिव, गोपीचंद, भरतहरी और अन्य लोक नायकों के साथ-साथ कबीर, सूरदास व गोरखनाथ के वाणी, भजन तथा कथाएं जोगिया सारंगी पर गाते हैं।

भीखा खान: 74, वर्षीय भीखाजी खामीज, सुहब, सौरठ, भैरवी, तोड़ी, बिलावल, मेघमल्हार और जोग जैसी प्राचीन लोक रागों के जानकार व मंगाणियार समुदाय के एक वरिष्ठ कलाकार हैं जो की अपनी परम्परागत लोक प्रस्तुतियों के लिए प्रसिद्ध हैं।



घेवर खान व धरा खान: कमायचा जैसे दुर्लभ वाद्य को बजाने वाले कुछ ही ऐसे कलाकार अब शेष रहे हैं। घेवर खान और धरा खान जो कमायचा के महान कलाकार पद्मश्री साकर जी के पुत्र है, इन दोनों भाइयों ने इस दुर्लभ साज और पिता की विरासत को आज भी सहेज कर रखा है। रिफ मे ये कुछ युवा कलाकारों के साथ इस अनूठे वाद्ययत्र पर रेगिस्तानी संगीत के सुरों के जादू को बिखेरेंगे।

इनके अलावा लगभग कुल 250 राजस्थानी लोक कलाकार इस साल रिफ में शामिल होगें।

पैको रेंटेरिया - भारत मे पहली बार

जेलिस्को (मेक्सिकन राज्य) कि धरती जिसने विश्व को महान गिटारिस्ट कार्लोस सैंटाना, मारिआची संगीत और टकीला दिये है इसी जेलिस्को से हमें एक और कला प्रवीण गिटारिस्ट मिले हैं । पैको रेन्टेरिया के रूप में। जिप्सी फ्लेमैंको और प्रगतिशील जैज बीट्स में महारत के साथ लेटिनो जुनून को व्यक्त करते हुए, पैको ने कार्लोस सैंटाना और लुसियानो पवारोटि जैसे कलाकारों के साथ प्रदर्शन किया है। लॉस लोबोस और एंटोनियो बैन्डेरास द्वारा लिखित और अभिनीत गीत के साथ उनकी मूल रचना एल मारियाची, चर्चित फिल्म डेसपेराडो का मुख्य गीत था।

2002 के लैटिन ग्रेमी नॉमिनेटेड कलाकार, इनका स्टीवन स्पीलबर्ग के स्टूडियो ने अपनी एक फिल्म- द लेजेंड ऑफ जोरो में प्रयोग हेतु साउंडट्रैक निर्माण के लिए चयन किया था।


जोधपुर रिफ व स्प्री फेस्टीवल(स्काटलैण्ड) की साँझा पेशकश - भारत मे पहली बार

 यूके-भारत संस्कृति वर्ष 2017 के तहत)

जोधपुर रिफ में दोनों देशों की कलाओ के मिलाप व मित्रता के तौर पर 6 अक्टूबर जोधपुर मे और स्प्री फेस्टीवल में (पैश्जली, स्काटलैण्ड 13 अक्टूबर ) प्रस्तुत होंगी।

इसमे रॅास एन्स्ली, जिन्हे बीबीसी-2 द्वारा काफी सराहना मिली है और इन्हें 2017 के श्रेष्ठ युगल लोक कलाकार (रॅास एन्स्ली व अली हटन) रुप में चुना गया है। ये यहां कुछ खास भारतीय कलाकारो के साथ संगत करेगें।

शूगलनिफ्टी और धुनधोरा- दि हाई रोड टु जोधपुर एल्बम का इंडिया प्रीमियर
हजारों मीलों की जमीनी दूरी के बावजूद इन दोनों समूहों में बहुत कुछ एक समान है। दोनों ने लगभग चार वर्षों तक एक साथ काम किया है। और अब इनका गठबंधन पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं। शूगलनिफ्टी और धुनधोरा को सुनकर कोई भी झूमे बिना नहीं रह पाता है। दो कम बोली जाने वाली भाषाओं- गेलिक और मारवाड़ी में गाते हुए भी ये संगीत की एक ही भाषा में संवाद करते हैं। इस राजस्थानी-स्कोटीश जोड़ी के काम को स्कॉटलैंड और भारत में रिकॉर्ड किया जाएगा और फ़िलमाया जाएगा। इनका यह एलबम 2018 की शुरुआत में रिलीज के लिए तैयार होगा।



वेल्श कहानीकार और भारतीय रहस्यमय संगीत के साथ राउंडहाउस सत्रः
जोधपुर रिफ में एक इस बार एक राउंडहाउस सत्र होगा, जिसमें वेल्श और भारतीय भाषाओं की एक संगीत श्रृंखला में कहानियां प्रस्तुत होंगी। यह जुगलबंदी अद्वितीय है, क्योंकि इसमें तीन उत्सवों का मेल है- फेस्टिवल ऑफ वॉयस, बियोंड दि बॉर्डर तथा जोधपुर रिफ।

 सिलामंका और रुबेनमशांगवा
असाधारण रूप से प्रतिभाशाली, मणिपुरी की गायक सिलामंका अपनी प्रतिभा कौशल को जोधपुर रिफ में प्रस्तुत करेगी। वे मोरंग साई और बसोक की दुर्लभ परंपराओं को अपने ग्रुप लाइहुई के साथ पेश करेंगी। नागा ब्लूज के जनक रुबेनमशांगवा एक नए तालमेल के साथ जोधपुर रिफ मंच पर मिलेंगे।

राजस्थान के आदिवासी भीलों से मिलिये :
दक्षिणी राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के भील मध्य भारत की जनजातियों से जुडे़ हुए हैं। उनके पारंपरिक संगीत में गाथा (कथा गीत), लोरी, भक्ति, अनुष्ठान गीत और प्रेम गीत प्रमुख हैं। वे द्विपदी (दो पंक्तियों के), त्रिपदी ;तीन पंक्तिद्ध और चतुस्पदी ;चार पंक्तिद्ध के गीत जो मुलरुप से वेदिक संगीत से जुड़े है जिन्हे ये अपनी आदि शैली में गाते हैं, जो तालबद्ध होती है। वे अपनी प्रस्तुतियों में ढोल, कौड़ी, थाली, घुंगरू, कुंडरू, तंबूरा और घुमेरा नृत्य का प्रयोग करते हैं।



क्लब मेहरान में बिक्सिगा 70
बिक्सिगा 70, ब्राजील को सबसे चर्चित एफ़रोबीट डांस संगीत बैंड है। ये प्रतिभाशाली संगीतकार ब्राज़ीलियाई और अफ्रीकी संगीत से प्रेरित समकालीन संगीत की रचना करते है, जिसमे सांबा और रेगे का प्रभाव व थोड़ा इलैक्ट्रॉनिका, कारिंबो और एथियो जैज का मिश्रण हैं। यह डांस शौकिनो के प्लेलिस्ट का ज़रूरी हिस्सा हो सकता है।

निकोटीन स्विंग का जैज मनोशे - भारत मे पहली बार
युवा जिप्सी जैज मास्टर निकोटीन स्विंग की धुनें ताजा और कातिलाना है। वे अमेरिकी स्विंग को जिप्सी स्ट्रिंग लय के साथ मिलाकर 30 के दशक का 'मनोशे' (जिप्सी जैज) पेश करते हैं।

वेबसाइट: www.jodhpurriff.org


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1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (18-08-2017) को "सुख के सूरज से सजी धरा" (चर्चा अंक 2700) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    स्वतन्त्रता दिवस और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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