January 2014 - #Shabdankan

एक आंधी है, जो कि अंधी है... अशोक गुप्ता | Arvind Kejriwal is a Talented and Experienced Person - Ashok Gupta

शुक्रवार, जनवरी 31, 2014 0
एक आंधी है, जो कि अंधी है... अशोक गुप्ता केजरीवाल से घंटा-घंटा भर की कार्यवाही का हिसाब माँगा जा रहा है, जिसमें महाजनी पार्टी की उछलकू...
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अनुभूत मनोदशाओं का एक दस्तावेज़ 'पराया देश’ -देवी नागरानी | Review of Pran Sharma's Book by Devi Nangrani

शुक्रवार, जनवरी 31, 2014 3
अनुभूत मनोदशाओं का एक दस्तावेज़ "पराया देश" देवी नागरानी  प्राण शर्मा हिंदी के लोकप्रिय कवि और लेखक हैं, गीत एवम ग़ज़ल के जा...
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ये कविताएं वहां से आई हैं जहां सूरज भी नहीं जाना चाहता - वर्तिका नंदा | Tinka Tinka Tihar - Vartika Nanda

मंगलवार, जनवरी 28, 2014 4
दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम कॉलेज के पत्रकारिता विभाग में प्रोफेसर वर्तिका नंदा, एक सौम्य और सशक्त पत्रकार, चिंतक, कवयित्री और...
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लमही का आगामी अंक 'औपन्यासिक' ! Next Issue of Lamhi - Aupanyasik

सोमवार, जनवरी 27, 2014 3
( ADVT ) कृपया अपनी प्रति अभी से आरक्षित करवा लें।विशेषांक की एक प्रति का मूल्य ₹ 50/- मात्र है। आजीवन सदस्यता के लिए ₹ 1000/-(शुल्क) ...
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तुम हो तो... मेरी नज़र में - वंदना गुप्ता | 'Tum ho to' Poetry Collection of Pratima Akhilesh - Review by Vandana Gupta

सोमवार, जनवरी 27, 2014 2
तुम हो तो... मेरी नज़र में                  - वंदना गुप्ता  पाथेय प्रकाशन जबलपुर से प्रकाशित कवयित्री प्रतिमा अखिलेश का प्रथम काव्य संग...
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टिकट के लिए बात कर दीजिये न - रवीश की रपट | Ravish Kumar on Aspiring Politicians @ravishndtv

रविवार, जनवरी 26, 2014
कही ऐसा तो नहीं कि समाज में फैली जिस गंदगी को लेकर हम बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, उसका श्रोत भी हम ही हैं? रवीश का ये आलेख पढ़ कर, उनका दुःख सम...
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गणतंत्र और स्त्री - मैत्रेयी पुष्पा | Women and Republic - Maitreyi Pushpa

बुधवार, जनवरी 22, 2014 3
गणतंत्र और स्त्री         - मैत्रेयी पुष्पा यह कैसा गणतंत्र है कि महिला आरक्षण बिल कब से लटका पड़ा है। पंचायती राज में महिलाओं को ...
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कवितायेँ: नीलम मैदीरत्ता 'गुँचा' | Hindi Poetry : Neelam Madiratta "Guncha"

मंगलवार, जनवरी 21, 2014 2
‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗‗ कवि श्री जगदीश कुमार नागपाल 'साधक'  की पुत्री नीलम मैदीरत्ता 'गुँचा'...
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जनतंत्र में कचहरी मृगतृष्णा गरीब की - जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविताएं | Hindi Poetry : Jitendra Srivastava

सोमवार, जनवरी 20, 2014 6
राजेन्द्र यादव जी ने सही कहा था "इन दिनों कविता का ओवर प्रोडक्शन हो रहा है।" इस ओवर प्रोडक्शन का सबसे ज्यादा खामियाज़ा पाठक को पह...
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