May 2014 - #Shabdankan

ग़लती बाबा और 'हड़बड़ पार्टी' की गड़बड़! - क़मर वहीद नक़वी

शनिवार, मई 31, 2014 0
ग़लती बाबा और 'हड़बड़ पार्टी' की गड़बड़! - क़मर वहीद नक़वी एक ग़लती बाबा हैं! दूसरों की ग़लतियों से पनपे और फूले. फूल-...
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ये कहाँ जा रहे हो साहित्य ? Literature ! Where are you going?

शुक्रवार, मई 30, 2014 0
राकेश बिहारी की ईमेल अभी-अभी मिली, पढ़ कर सकते में हूँ... तय नहीं कर पा रहा कि क्या कहूँ; बहरहाल मुझसे जो हो पाया किया... आगे आप-सब ही कहें...
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हिंदीभाषी समाज अपने लेखकों को भूलता जा रहा है - अशोक मिश्र Hindi-speaking society is forgetting their writers - Ashok Mishra

शुक्रवार, मई 30, 2014 0
पुस्तक मेला के निहितार्थ अशोक मिश्र (संपादक बहुवचन) पुस्तक मेले में अशोक मिश्र एक और नजारा यह देखने को मिला कि मेला आयोजक संस्था ...
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कवि-खोजी मनमौजी सिलसिला - अशोक चक्रधर | Chakradhar-Chaman

मंगलवार, मई 27, 2014 0
चौं रे चम्पू  कवि-खोजी मनमौजी सिलसिला अशोक चक्रधर — चौं रे चम्पू! है कहां? दिखौ ई नायं भौत दिनन ते! कहां भटकि रह्यौ ऐ रे लल्ल...
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उनके (जगदम्बा प्रसाद दीक्षित) पासंग हिन्दी साहित्य में न कोई था, न है, न होगा - मृदुला गर्ग | Mridula Garg remembering Jagdamba Prasad Dixit

सोमवार, मई 26, 2014 0
जगदम्बा प्रसाद दीक्षित जन्म 1934 बालाघाट (महाराष्ट्र) - मृत्य 20 मई  बर्लिन  प्रज्ञा और करुणा के अद्भुत मिश्रण के जादूगर को मेरी ...
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इलाहबाद में साहित्यिक हलचल | Literary activity in Allahabad

सोमवार, मई 26, 2014 0
इलाहबाद में साहित्यिक हलचल ख़ुशी होती है इलाहबाद में शुरू हुई इन साहित्यिक गतिविधियों को देख। अंजुमन प्रकाशन ने 25 तारीख को छः पुस्तक...
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अद्भुत ऊर्जावान देश - अशोक चक्रधर | Ashok Chakradhar on Narendra Modi

शनिवार, मई 24, 2014 0
अद्भुत ऊर्जावान देश  — अशोक चक्रधर चौं रे चम्पू! - अशोक चक्रधर — चौं रे चम्पू! बड़ौ बिदवान बनै है, जे बता चुनावन ते का सिद्ध भयौ? ...
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प्राण शर्मा (संस्मरण) - गुरु की तलाश : Pran Sharma "Memoirs" Search of Guru

शुक्रवार, मई 23, 2014 5
कुछ अपनी, कुछ औरों की गुरु की तलाश - प्राण शर्मा मेरे दोस्तों के उपेक्षा भरे व्यवहार के बावजूद भी कविता के प्रति मेरा झुकाव बरक़रार र...
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शब्द भर जीवन उर्फ दास्तान-ए-नगमानिगार - प्रेम भारद्वाज | Shabd bhar jivan... Kahani - Prem Bhardwaj

मंगलवार, मई 20, 2014 0
शब्द भर जीवन उर्फ दास्तान-ए-नगमानिगार प्रेम भारद्वाज ‘नाटक का अभिनेता उसे ही सच मानता है जो हो रहा है। लेकिन जीवन में जो हो रहा है उसे...
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