June 2014 - #Shabdankan

प्रोफेसर भी प्रायः अपनी सत्ता का प्रशासन में लोप कर देते हैं - अपूर्वानंद | Design and Study - Apoorvanand

सोमवार, जून 30, 2014 1
डिजाईन और शिक्षा - अपूर्वानंद दिल्ली विश्वविद्यालय के नए कार्यक्रम के साथ गड़बड़ यह हुई कि उसने बाज़ार की फौरी ज़रूरत को पूरा करने वाले कर्...
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गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvellous Poems

गुरुवार, जून 26, 2014 3
गुलज़ार की 10 बेहतरीन कविताएं! गीतकार गुलज़ार ने कई फ़िल्मों के लिये गीत तो लिखे ही हैं साथ ही उन्होंने कई बेहतरीन कविताएं भी लिखी है...
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दो अद्भुत कवितायेँ, प्रियदर्शन की | Two Amazing Poems of Priyadarshan

मंगलवार, जून 24, 2014 0
बांयें से प्रो० पुरुषोत्तम अग्रवाल, प्रियदर्शन, सुश्री सुमन केशरी व भरत तिवारी ए क जन्मदिन पर डॉक्टर इवा हजारी की याद मुझे नहीं माल...
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छह साल से चेन्नई ज़िन्दाबाद!- क़मर वहीद नक़वी Chennai has been doing 'This' since 6 years - Qamar Waheed Naqvi

सोमवार, जून 23, 2014 0
राग देश जी हाँ, पिछले छह सालों से, जब भी वहाँ किसी मरीज़ को ऐसी ज़रूरत पड़ी, तो वहाँ ट्रैफ़िक को थाम कर 'ग्रीन चैनल' बनाया गय...
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नज़्में - सचिन राय | Nazm - Sachin Rai

शुक्रवार, जून 20, 2014 0
वो भूली दास्तां ... एक रात हुआ कुछ ऐसा - कि मेरे बिस्तर पर लेटते ही और नींद के आने से पहले, एक नज़्म उतर आई, मेरी इन बंद आँखों में। ...
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नासिरा शर्मा - कहानी: बेगाना ताजिर Hindi Kahani Tajir by Nasera Sharma

गुरुवार, जून 19, 2014 0
बेगाना ताजिर* नासिरा शर्मा * ताजिर = Trader सब कुछ माल की खपत पर होता है । जब ख़रीदार नहीं मिलता तो माल पड़ा रहता है । सारे दरवाज़े...
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2014 का सबसे बड़ा सवाल, मुसलमान! - क़मर वहीद नक़वी The Biggest Question of 2014, Musalman! - Qamar Waheed Naqvi

बुधवार, जून 18, 2014 0
रागदेश 2014 का सबसे बड़ा सवाल, मुसलमान! - क़मर वहीद नक़वी  बीजेपी को लगता है कि 'हिन्दुत्व' अब बैसाखी के बजाय बाधा ही है. द...
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पाँच कवितायेँ - दीप्ति श्री ‘पाठक’ 5 Poems: Deepti Shree 'Pathak' [Hindi-Kavita]

मंगलवार, जून 17, 2014 1
दीप्ति श्री 'पाठक' वर्तमान में 'हिंदी विभाग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय', वाराणसी में हिंदी पत्रकारिता 'स्नातकोत्तर...
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ओम थानवी को 'माधवराव सप्रे राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान' Madhav Rao Sapre National Journalism Award' to Om Thanvi

सोमवार, जून 16, 2014 0
दैनिक समाचार पत्रों की मुख्यधारा की पत्रकारिता में          साहित्य और संस्कृति पर विमर्श और बहस की परंपरा को                           ...
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हृषीकेश सुलभ - कहानी: स्वप्न जैसे पाँव | Hindi Kahani: Hrishikesh Sulabh - Swapn Jaise Paanv

रविवार, जून 15, 2014 3
सुबह हुई। उसे चाय की तलब लगी। पर उसके पास समय नहीं था।  उसने सोचा, इतने असुरक्षित जीवन में किसी इच्छा का क्या महत्त्व, चाहे वह चाय पीने ...
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