दलेस में कलेश | Dalit Lekhak Sangh - White Paper


दलित लेखक संघ के आठवां चुनाव सम्पन्न पर स्वेतपत्र जारी

दलेस में कलेश | Dalit Lekhak Sangh - White Paper



दिनांक 12/05/2015 ( रविवार) को शाम 5:30 बजे दलित लेखक संघ की बैठक स्थान 'आल इंडिया फ़ाईन आर्ट एंड क्राफ्ट सोसाइटी' के लॉन में बुलाई गई। जिसमें 6 महीने की अस्थाई कार्यकारिणी को भंगकर इसके स्थान पर नई कार्यकारिणी की चुनाव प्रक्रिया सम्पन हुई। सर्वसम्मति से निम्न लिखित पदाधिकारी तथा सदस्य चुने गए - 
अध्यक्ष -  कर्मशील भारती
उपाध्यक्ष - कुसुम वियोगी व संतराम आर्य 
महासचिव - हीरालाल राजस्थानी 
सचिव - जसवंत सिंह जनमेजय 
कोषाध्यक्ष - पुष्प विवेक 
मीडिया प्रभारी व प्रवक्ता - रजनी तिलक 
कार्यकारिणी सदस्य - उमराव सिंह जाटव, डॉ. पूरन सिंह,  शील बोधि


दिनांक 02 फरबरी 2014 को आंबेडकर भवन में 6 महीने के लिए अस्थाई कार्यकारिणी का गठन हुआ और उसमें यह भी निर्णय लिया गया कि 6 महीने बाद इस कमिटी की समीक्षा करवाकर स्थाई या भंग करवाकर नई स्थाई कार्यकारिणी का गठन कर लिया जायेगा। लेकिन कुछ कारणों से यह निर्णय निश्चित समय में नहीं लिया गया। आखिरकार 03 मई 2014 को 26 अलीपुर रोड दिल्ली में कार्यकारिणी की मीटिंग रखी गई। जिसका एजेंडा - दलित लेखक संघ आंतरिक की समस्याओं पर चर्चा। अध्यक्ष के न आने पर कार्यकारिणी की मौजूदा मीटिंग में उपाध्यक्ष माननीय शीलबोधि को सभा अध्यक्ष घोषित किया गया। महासचिव द्वारा दलेस की आंतरिक समस्याओं रखा गया।  जिसमें मुख्य समस्याएं - 

1) संघ के अध्यक्ष द्वारा कार्यकारिणी की बैठक में लिए गए निर्णयों को दरकिनार करना। 
2) यह कहकर की संघ को इससे क्या लाभ दलित लेखकों की उपेक्षा करना। 
3) महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद को भी उपेक्षित कर मनमानी कर एकाधिकार चेष्टा द्वारा अलोकतांत्रिक तरीके से कार्यक्रम करना। 
4 ) दलित लेखक संघ में इक्कठा हुए फंड की जानकारी न संघ के कोषाध्यक्ष को है न ही महासचिव को। 
5) संघ के अध्यक्ष द्वारा संघ का बैनर निजी स्वार्थों की पूर्ति हेतु उपयोग करना। 
6) कार्यक्रम की रुपरेखा अंतिम समय तक महासचिव को नहीं दी जाती कि कार्यक्रम में कौन-कौन वक्ता व कवि/ कहानीकार शामिल होंगे। 
7) कार्यक्रम के स्थानांतरण की जानकार भी महासचिव को समय रहते नहीं दी जाती। 
8) कार्यकारिणी की मीटिंग से अध्यक्ष बिना सूचित किये चले जाना एक गैरजिम्मेदार भूमिका  निभाना । 
9) कार्यक्रम की रिपोर्टिंग अपने मनमाने तरीके से अध्यक्ष द्वारा की जाती है।  जिसमें अहम जानकारियों को गौण कर दिया जाता है। जब की यह जिम्मेदारी महासचिव को निभाने देना चाहिए। 

03 मई 2015 तारीख को भी अध्यक्ष ने एक अवैध कार्यक्रम रखा हुआ था। जिसकी कोई सूचना महासचिव के पास नहीं थी। जबकि महासचिव ने यह मीटिंग अध्यक्ष से अनुमोदन करवाकर ही रखी थी। 03 मई 2015 मीटिंग में न आकर अवैध कार्यक्रम में जाना अनुशासनहीनता का परिचय दिया गया अध्यक्ष द्वारा। लिहाजा अंत में यह निर्णय लिया गया कि कार्यकारिणी भंग की जाती है और इसके स्थान पर तीन सदस्यों की समन्वय कमिटी बनाई गई जिसमें संतराम आर्य, कर्मशील भारती व कुसुम वियोगी को चुना गया। यही कमिटी अब आगे की कार्यवाही तय करेगी। कमिटी ने चुनाव घोषणा 10 मई 2015 सुबह 11 बजे 26 अलीपुर रोड में लोकतान्त्रिक तरीके से किये जाने कि की। 

समन्वय कमिटी ने मीटिंग 10 मई 2015 को बुलाई। जिसमें समन्वय कमिटी के सदस्यों सहित लगभग 40-50 लोग इक्क्ठा हुए। 20 तो कार्यकारिणी के सदस्य थे, तीन- चार लेक्चरर, छ- सात लोग जाने पहचाने राजनीति पार्टियों से सम्बंदित थे जिनका लेखक संघ से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था और बीस के आसपास पूर्व अध्यक्ष ने अपने जामिया से छात्र-छात्रों को  बुला लिया था।  समन्वय कमिटी के सदस्यों ने इसका विरोध किया कि यह कोई काव्यगोष्ठी या कोई सम्मलेन नहीं है  जो इन विद्यार्थिओं को इस चुनावी प्रक्रिया में शामिल किया जाये। इस पर पूर्व अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि यह यहीं रहेंगे और चुनाव में हिस्सा भी लेंगे। इस तरह अनुशासनहीनता और समन्वय कमिटी की अवहेलना देखते हुए कमिटी की ओर से माननीय कर्मशील भारती ने घोषणा की कि आज की चुनाव प्रक्रिया रद्द की जाती है और अगली बैठक के लिए समन्वय कमिटी तिथि तय कर आप सभी सदस्यों को सूचित कर देगी। लेकिन पूर्व अध्यक्ष ने मनमानी करते हुए अपने विद्यार्थिओं से ही असवेधानिक व अलोकतांत्रिक तरीके से चुनाव करने की चेष्टा किये जाने पर तथा दलेस के सदस्य  उमराव सिंह जाटव पर हाथा-पाई करने पर  दलेस अपना विरोध प्रकट करता है साथ ही इसके लिए दलित लेखक संघ उन अनुशासनहीन सदस्यों पर संघ के संविधान के मुताबिक उचित कार्यवाही करेगा। 

महासचिव 
दलित लेखक संघ  

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