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साहित्यिक, सामाजिक ई-पत्रिका Shabdankan


ताज़ा है

ममता कालिया

संपाद्य्कम

ताज़ा तरीनमः

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स्वप्निल श्रीवास्तव, कविता में आज...

Thursday, July 18, 2019 0
भगोड़े स्वर्ग में छिपे हुए हैं और हम उन्हें नर्क में खोज रहे हैं... स्वप्निल श्रीवास्तव, कविता में आज... कविताओं में भाषा...
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प्रो. नामवर सिंह की चूक थी कि निर्मल वर्मा को ... | नामवर पर विश्वनाथ - 2

Friday, July 12, 2019 0
कविता में प्रत्येक शब्द और पंक्ति पर विचार करते हैं लेकिन कहानी में नहीं। कहानी की भी उसी तरह से व्याख्या होनी चाहिए |  नामवर...
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जिसे सब पढ़ते हैं उसे कौन पढ़ाता है ? — विनीत कुमार

Sunday, July 07, 2019 1
कभी पता तो करो कि सौ करोड़ से ज्यादा आबादी वाले देश में तुम्हारी किताबों की पांच सौ प्रति छापकर वो जो जगत कल्याण कर रहा है, उसमें उसक...
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रेशम के लच्छे जैसी स्वर लहरियाँ | नामवर पर विश्वनाथ - 1

Saturday, July 06, 2019 0
रेशम के लच्छे जैसी स्वर लहरियाँ | नामवर पर विश्वनाथ - 1 नामवरजी ने आलोचक के रूप में जितनी ख्याति पाई उतनी ख्याति वह कवि रूप ...
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कवि को न पढ़े गए से पढ़ें! — सुधा सिंह — आलोकधन्वा की कविताओं का सार, संसार

Tuesday, July 02, 2019 0
आलोकधन्वा की कविताओं का सार, संसार  कवि को न पढ़े गए से पढ़ें! —  सुधा सिंह  आलोकधन्वा सन् सत्तर के दशक के महत्वपूर्ण कवि ...
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