#Shabdankan
#Shabdankan

साहित्यिक, सामाजिक ई-पत्रिका Shabdankan

तोड़क

चुनिंदा

अभिसारम

संपाद्य्कम

ताज़ा तरीनमः

अधिकम्

व्यंग्य ― स्वार्थ के बवंडर तले राजधानी ― डॉ अनिता यादव

मंगलवार, जून 19, 2018 0
सियासी धुंधलके को हटाना ‘पायजामें में नाड़ा डालने’ जैसा नहीं हैं। न ही बापू की तरह बैठ कर चरखा चलाने सरीखा बल्कि कंजूस की गांठ से पैसा...
और आगे...

दलित राजनीति के अलावा भी 'काला' को देखने के संदर्भ हैं — प्रकाश के रे | #Kaala

सोमवार, जून 18, 2018 0
कोई फिल्म या कहानी एक रचनात्मक प्रक्रिया से गढ़ी जाती है, पर उसका एक संदर्भ-बिंदु जरूर होता है. इसी में अनेक तत्वों को मिलाकर कथानक बनता...
और आगे...

उषाकिरण खान — मैथिली कथा — "नींबू का स्वाद" | #Kahani #Shabdankan

गुरुवार, जून 14, 2018 0
दादी का बागीचा समृद्ध था। केला, पपीता, नींबू और आँवले के पेड़ थे। नींबू खूब फलता। चोरी होने के भय से नींबू काँटों की बाड़ से घिरे थे। भो...
और आगे...

मृणाल पाण्डे — एक सुकवि का मर्म थाहना

सोमवार, जून 11, 2018 0
देवदत्त पटनायक की वर्तिका का बल पांडित्य बघारने पर केंद्रित नहीं — मृणाल पाण्डे गैर-राजनीतिक इरादे से देसी परंपरा को हिंदी मे...
और आगे...

बहुरूपिया, संजय कुंदन की कहानी | #Hindi #Kahani #Shabdankan

सोमवार, जून 04, 2018 0
मैंने चपरासी से कहकर अपने और उसके लिए चाय मंगवाई। चाय पीने के बहाने वह सामने बैठ गया वर्ना मैं तो उससे लेख लेकर उसे तुरंत विदा कर...
और आगे...

क्यों मुस्लिम पहचान को राष्ट्रीय पहचान से अलग करके देखा जाता है — लैला तैयबजी

शुक्रवार, जून 01, 2018 0
क्यों मुस्लिम पहचान को राष्ट्रीय पहचान से अलग करके देखा जाता है — लैला तैयबजी मुस्लिम महिलाओं से जुड़े मुद्दों को केवल मुस्लिम...
और आगे...

बीजेपी के वोट कम हो रहे हैं, #खतरे_की_घंटी — पुण्य प्रसून बाजपेयी @ppbajpai

शुक्रवार, जून 01, 2018 0
क्या बैंकों का घाटा। एनपीए की रकम। बट्टा खाते में डालने का सच सबकुछ चुनावी लोकतंत्र से जा जुड़ा है जहां पार्टी के पास पैसा होना चाह...
और आगे...

लोकप्रिय पोस्ट

Pages