इफ़्तार: कहानी से सिनेमा तक

डॉ सच्चिदानंद जोशी | इफ़्तार कहानी से सिनेमा तक | शब्दांकन


डॉ सच्चिदानंद जोशी की कहानी पर बनी शॉर्ट फ़िल्म

भारतीय समाज की सबसे सुंदर परंपराओं में से एक है विविधता में सह-अस्तित्व। धर्म, भाषा और संस्कृतियों की भिन्नता के बावजूद लोगों के बीच जो मानवीय संबंध बनते हैं, वही इस देश की असली पहचान हैं। इसी संवेदना को अत्यंत मार्मिक ढंग से व्यक्त करती है डॉ सच्चिदानंद जोशी की कहानी “इफ़्तार”

यह कहानी शब्दांकन पर 6 अगस्त 2020 को प्रकाशित हुई थी और पाठकों के बीच विशेष रूप से सराही गई। अब इसी कहानी पर आधारित एक शॉर्ट फ़िल्म “Iftaar” बनाई गई है जिसका निर्देशन प्रसिद्ध फ़िल्मकार अरिंदम सिल ने किया है।

कहानी से फ़िल्म तक

डॉ सच्चिदानंद जोशी की इसी कहानी को आधार बनाकर शॉर्ट फ़िल्म “Iftaar” बनाई गई है। यह फ़िल्म भारतीय समाज में मौजूद सांप्रदायिक सद्भाव, करुणा और साझा मानवता की भावना को सामने लाती है।

निर्देशक: अरिंदम सिल
कहानी: डॉ सच्चिदानंद जोशी
निर्माता: सतनाम सिंह अहलूवालिया

प्रीमियर स्क्रीनिंग

शॉर्ट फ़िल्म “Iftaar” की प्रीमियर स्क्रीनिंग और राष्ट्रीय लॉन्च नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।

स्थान
India Islamic Cultural Centre (IICC) Auditorium
87–88, Lodhi Road, New Delhi

तारीख
Wednesday, 18 March 2026

समय
03:00 PM onwards

फ़िल्म प्रदर्शन के बाद High Tea का आयोजन भी किया जाएगा।

इस फ़िल्म के निर्माण में Senco Gold Support Partner के रूप में जुड़ा है।

शांति और सह-अस्तित्व का संदेश

“Iftaar” केवल एक कहानी या फ़िल्म नहीं है। यह उस साझा मानवीय धरातल की याद दिलाती है जिस पर भारतीय समाज खड़ा है। यह रचना हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि अलग-अलग आस्थाओं के बावजूद मनुष्य की संवेदना, करुणा और सह-अस्तित्व की भावना ही हमें एक-दूसरे से जोड़ती है।

मूल कहानी पढ़ें

डॉ सच्चिदानंद जोशी की मूल कहानी “इफ़्तार” शब्दांकन पर उपलब्ध है।

यहाँ पढ़ें पूरी कहानी

संपर्क

Story Writer of Iftaar
Dr Sachchidanand Joshi

Producer
Satnam Singh Ahluwalia
Chairman, IHA Foundation

RSVP
Madhavendra
98108 76595

Rajiv Ranjan
98188 84779

००००००००००००००००

nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ

  1. I remember feeling completely overwhelmed while working on my law assignments because every source I checked seemed either too complicated or too vague to properly understand the legal concepts. It was frustrating trying to organise strong arguments and research in a way that actually met academic expectations. After going through guidance connected with Law Essay Writing Service UK from Native Assignment Help, I started understanding how to structure legal discussions more clearly, use relevant case references properly, and manage my essay writing with a lot more confidence and clarity.

    जवाब देंहटाएं

ये पढ़ी हैं आपने?

भवतु सब्ब मंगलं  — सत्येंद्र प्रताप सिंह | #विपश्यना
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
फ्रैंक हुजूर की इरोटिका 'सोहो: जिस्‍म से रूह का सफर' ⋙ऑनलाइन बुकिंग⋘
Hindi Story: दादी माँ — शिवप्रसाद सिंह की कहानी | Dadi Maa By Shivprasad Singh
NDTV Khabar खबर
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
मन्नू भंडारी की कहानी — 'रानी माँ का चबूतरा' | Manu Bhandari Short Story in Hindi - 'Rani Maa ka Chabutra'
थोड़ा-सा सुख - अनामिका अनु की हिंदी कहानी
मैत्रेयी पुष्पा की कहानियाँ — 'पगला गई है भागवती!...'