सनी लिओन के ब्रांड अम्बेसडर सुधीश पचौरी ? - अशोक गुप्ता @SunnyLeone


Sunny Leone's brand ambassador Sudhish Pachauri ? - Ashok Gupta

खामोश, विज्ञापन जारी है....

अशोक गुप्ता     


मानवीय संवेदना और अस्मिता के सामने यह एक बर्बर और विरोधी समय है, और इसकी लगाम पूरी तरह बाज़ार के हाथ में है. बाज़ार ने हर छोटी बड़ी शह को विक्रयशील पदार्थ में बदल दिया है. बाज़ार के हाथों सब बिकने को तैयार है और बाज़ार जिसे खरीदने के लिए चुन लेता है उसकी संवेदना और विवेक की नस को कुचल कर ही उसे अपने बेड़े में शामिल करता है और फिर उसकी प्रतिभा का अपने ढंग से इस्तेमाल करता है. बाज़ार के इस करिश्मे में ज़बरदस्त चकाचौंध है कि इसके आगे समाज और जन जीवन में कुछ भी घटता हुआ नजर आना बंद हो जाता है. यह सचमुच एक नृशंस बर्बरता है, लेकिन है, और बाकायदा है.

     एक ओर आंधी में टूटते पेड़ के पत्तों की तरह ऐसी खबरों से धरती ढकती जा रही है, जिनमें नवजात जन्मी बच्चियों से लेकर साथ सत्तर बरस की वृद्धाओं के साथ बलात्कार हो रहा है, बलात्कार के बाद हत्याएं हो रही है और इस प्रक्रिया को एक खेल की तरह खेलते हुए उसका उन्माद जिया जा रहा है. अन्यथा, स्त्री देह में तमाम तरह की वस्तुओं को ठूसने का क्या अर्थ हो सकता है... इस कृत्य का प्रलाप बाज़ार के सेंसेक्स की तरह संवेदनशील है. देखिये ज़रा से अनुकूल संकेत के बाद ऐसे आरोपियों की भीड़ लग गयी है जो नाबालिग बताये जा रहे हैं. वह हैं तो नाबालिग लेकिन अपनी कारगुजारी में किसी बिसहे से कम नहीं हैं. बारह चौदह बरस का किशोर नन्हीं बच्ची या लड़की से न केवल बलात्कार कर गुजरने में माहिर है बल्कि उसका मनोबल पीड़िता की हत्या कर देने भर भी सबल है. निर्भया काण्ड के बाद ऐसी घटनाओं ने देश भर के रोजनामचे में अपनी अव्वल नंबर की जगह बना ली है. और अभी तक कोई ऐसा शोध, ऐसा सामाजिक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण सामने नहीं आया है जो यह बता सके कि ऐसी कौन सी मनःस्थिति है जो पुरुष को अकस्मात् मानव से मात्र शिश्न में बदल दे रही है, और ईश्वर ने किसी के भी शिश्न में आँखें नहीं दी हैं. इसलिए पुरुष चाहे वह पिता की भूमिका में हो, भाई की भूमिका में हो या गुरु हो, वह संबंध निरपेक्ष किसी भी इंसानी मादा के ऊपर शिश्न बन कर उतर जा रहा है. सामाजिक परिदृश्य इस दुराचरण से भरा हुआ है और समाज को यह जानना बाकी है कि इस पुरुष की इस भीषण मानसिक स्थिति का कारण क्या है...


Jansatta, May 1, 2016

     ऐसे में, कम से कम यह तो हो ही सकता है कि समाज को ऐसी आबोहवा, ऐसी परिस्थितियों और ऐसी सामग्री से तब तक दूर रखा जाय जब तक ऐसा कोई शोध सामने न आ जाय कि इन घटनाओं का संबंध पुरुष में उद्दीपनकारी उन्माद संचालन से नहीं है. फिलहाल अभी तो यही मुक्कमल तौर पर माना जा रहा है कि इस दौर का पुरुष किसी भी नशीले विचलन को संयमपूर्वक सह पाने में समर्थ नहीं है और उस विचलन की दशा में वह किसी के भी साथ कोई भी अनर्गल और मर्यादाहीन आपराधिक कृत्य कर सकता है.

     क्या इस तर्क के आधार पर हमारी सामजिक व्यवस्था कोई ‘रोकथाम’ जैसी नीति या गतिविधि अपना रही है ?

     उत्तर है, ‘नहीं’ बल्कि बाज़ार उस उन्माद्कारी आचरण को हवा दे रहा है, कि नशे की संस्कृति व्यापक हो और घातक नशीले पदार्थों का प्रयोग प्रगतिशीलता का लक्षण माना जाय. उपभोक्ता गर्व के कहें कि उन्हें तो ‘इसके’ बिना रात को नींद नहीं आती.

     क्या ‘इसके’ का खुलासा करना ज़रूरी है ? यदि हाँ, तो लीजिये, पहला नाम तो शराब का ही है. कोई भी व्यवस्था चाहे वह राजनैतिक हो या न्यायिक, शराब के प्रचलन पर रोक नहीं लगा सकती. कारण स्पष्ट है, शराब का प्रचलन बाज़ार की मांग है. बात ख़त्म.

     दोस्तों, यह तो केवल बात की भूमिका हुई.

     ताज़ा नज़ारा यह है कि पोर्न सामग्री को बाज़ार बाकायदा समाज में योजनाबद्ध ढंग से उतारने की तैयारी में है. इस प्रोजेक्ट की कैरियर हैं सनी लिओनी और ब्रांड अम्बेसडर मैं हिंदी के प्रबुद्ध विचारक सुधीश पचौरी. हिंदी के प्रबुद्ध वर्ग के पाठकों के एकमात्र समाचारपत्र में सुधीश पचौरी का लम्बा आलेख प्रकाशित है जो वस्तुतः सनी लिओनी की पोर्नोग्राफिक वेब साईट का विज्ञापन है. इसमें सुधीश पचौरी अपने भावी उपभोक्ताओं को सूचित करते हैं कि यह साईट मोबाईल फोन पर एक ऐप की तरह उपलब्ध होगी और इसे घर में, दफ्तर में संसद सदन में, चिकित्सालय में कार्यरत लोगों द्वारा ऑपरेशन थियेटर में या अन्यत्र कहीं भी देखी जा सकती. सुधीश पचौरी अपने दायित्वधर्म में यह बखानते है कि पोर्नोग्राफिक सामग्री का रसास्वादन भारत में आदिकाल से हो रहा है और रीतिकालीन साहित्य इस बात की गवाही देता है, यानी कि इसलिए इस साईट पर प्रस्तुत सामग्री के उपयोग में कोई गलत बात नहीं है. सुधीश पचौरी हवाला देते है कि सनी लिओनी की इस महत्वाकांक्षी योजना की खबर अंग्रेजी अखबारों में पहले ही आ चुकी है. ऐसे में यह स्पष्ट है कि यह युवाओं के हाथ में वैसे ही सहज उपलब्ध होगी जैसे एक सिगरेट...

अशोक गुप्ता

305 हिमालय टॉवर, अहिंसा खंड 2, इंदिरापुरम,
गाज़ियाबाद 201014
09871187875 | ashok267@gmail.com

     3 G तथा 4 G वाले फोन तो आजकल सब्जी भाजी और किराने वालों के पास भी आसानी से मिल जाते हैं. यह उनके रोज़मर्रा के काम का एक सहायक उपकरण है, ऐसे में, सनी लिओनी की इस कारगुजारी का लाभ बाज़ार भले ही अपने अनंत हाथों से उठाये, पोर्नोग्राफी का यह ‘अतिसुलभ’ व्यसन देशव्यापी स्तर पर पुरुष के शिश्न में बदल जाने का व्यापक महारोग बन जाने वाला है.

     निसंदेह इससे सनी लिओनी भी खूब कमाएंगी, लेकिन वह इस भूल में न रहें कि उनका यह कारनामा उन्हें बड़ी साहित्यिक प्रतिष्ठा दिलाने वाला औज़ार है. वह इस भूल में भी न रहें कि सुधीश पचौरी उनके ब्रांड अम्बैसडर होंगे. दरअसल वह उस साईट के ब्रांड अम्बेसडर होंगे जिसे बाज़ार लॉन्च करके कमाई का रास्ता खोलेगा, और इस प्रक्रिया में अनेकों असली या आभासी सनी लिओनी तैयार हो जाएंगी और बाज़ार फैलता रहेगा.

     सुधीश पचौरी ने अपने वक्तव्य में एक बहुत पते की बात, बहुत धीमी आवाज़ में कही है, ठीक उसी तरह जैसे बाजारी उत्पादों पर बहुत महीन अक्षरों में संवैधानिक चेतावनी लिखी जाती है. उन्होंने माना कि रीतिकालीन पोर्नोग्राफिक कही जा सकने वाली सामग्री में उन्माद्कारी देह विधान के साथ मन भी समान्तर रूप से सहयोगी होता है, जब कि इस सनी लिओनी टाइप पोर्न में केवल यौनिक प्रक्रियाओं के देह संचालन का उन्माद है और मन जैसी आत्मा का घोर निर्वात है. चलो, सुधीश पचौरी ने कुछ तो मानवीयता के मद्देनज़र कहा.

     यहाँ से मैं हाल में हो रही बलात्कारी गतिविधियों के एक कारक तत्व तक पहुँचने का प्रयास करता हूँ.

     देह संबंध चाहे वह पति-पत्नी के बीच में हों या इतर, यदि उनमें दोनों की सकारात्मक सहभागिता का साक्ष्य देती मन की उपस्थिति नहीं होती तो उसका परिणाम अतृप्ति भरे असंतोष से होता है. चूंकि सामान्य सामजिक भाषा बोध इस प्रक्रिया में पुरुष को ‘लेने वाला’ और स्त्री को ‘देने वाली’ की भूमिका सौंपता है तो इस अतृप्ति का असंतोष पुरुष को पागल कर देता है. वह तृप्ति के तमाम अप्राकृतिक, कृतिम और बर्बर क्रिया कलाप आजमाने लगता है और वह कभी नहीं जान पाता कि उसकी अतृप्ति का मूल कारण उसकी इस ‘लेने’ की क्रिया में मन की अनुपस्थिति है.

     ऐसे में दोस्तों, मन की अनुपस्थिति में इतर ‘आसनों’ से सज्जित सनी लिओनी की पोर्न साईट समाज में क्या आग लगाएगी यह सहज समझा जा सकता है.. पर किया क्या जाय, बाज़ार तो खोज खोज कर नये नीरो ला रहा है, जिनके पास उनकी प्रतिभा की बांसुरी है और जिनका विवेक और संवेदना बाज़ार ने दबोच रखी है.

     क्या बाज़ार की यह विष बयार किसी ढब रोकी जा सकती है ?
००००००००००००००००
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
ऐ लड़की: एक बुजुर्ग पर आधुनिकतम स्त्री की कहानी — कविता
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
मैत्रेयी पुष्पा की कहानियाँ — 'पगला गई है भागवती!...'
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
परिन्दों का लौटना: उर्मिला शिरीष की भावुक प्रेम कहानी 2025
मन्नू भंडारी की कहानी — 'रानी माँ का चबूतरा' | Manu Bhandari Short Story in Hindi - 'Rani Maa ka Chabutra'
Hindi Story: कोई रिश्ता ना होगा तब — नीलिमा शर्मा की कहानी
बिहारियों का विस्थापन: ‘समय की रेत पर’ की कथा