राजेन्द्र यादव को समर्पित अनामिका चक्रवर्ती ''अनु'' की कविता

परिचय को रोमांचक कर गए।
  प्रश्नो को मुक्त करने वाले,
तुम सोए नहीं अब जागे हो।
रूढ़ीवादिता के छज्जे तले,
घुटती सांसो को खुला आसमान देने वाले।
दलित को कलम का ताज देने वाले।
नवयुग का निर्माण करने वाले।
तुम बिखर नहीं सकते,
तुमनें आँखे बंद कर ली।
कितनी आँखो में रोशनी भर गए।
स्त्रीत्व की कलम में ,
आत्म विश्वास का रंग भर गए।
बदरंग होकर शत्रु के दिल में ,
राज करनें वाले।
इंद्रधनुषि मन को ,
श्वेत देह कर गए।
साहित्य के अंबर में,
 मात और शह लेकर,
जिंदादिली से जीने वाले।
बेबाकी का हुनर लिए,
 बस एक ही चुक कर गए।
जाना तो तय था,
पर जाते जाते ,
अपनी मौत को संदिग्ध
कर गए....।
पर याद रखेगी दुनिया,
तुम ही हो ...
जो साहित्य की धरा पर,
 अपनी
 कलम का खून सींच गए..।
तारिख भी तुमने चुनी,
कमाल की,
जन्म और म़ृत्यु का अंक
 ‘एक’ कर गए..

अनामिका चक्रवर्ती ''अनु''

nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
चौराहे का पेट्रोल पंप : रीता दास राम की मार्मिक कहानी
इफ़्तार: कहानी से सिनेमा तक
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
'रक्षा-बन्धन' — विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक की कहानी | Rakshabandhan - Vishwambharnath Sharma Kaushik
नासिरा शर्मा के उपन्यास 'शाल्मली’ के बहाने स्त्री विमर्श पर चर्चा —  रोहिणी अग्रवाल
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
भवतु सब्ब मंगलं  — सत्येंद्र प्रताप सिंह | #विपश्यना
अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika
वह कलेक्टर था। वह प्रेम में थी। बिल उसने खुद चुकाया। | ग्रीन विलो – अनामिका अनु