मैं सेफ सीट का खेल नहीं खेल रहा - अरविंद केजरीवाल (रपट: सिद्धांत मोहन तिवारी) I am not playing game of safe seat - Arvind Kejriwal

मैं सेफ सीट का खेल नहीं खेल रहा - अरविंद केजरीवाल


- सिद्धांत मोहन तिवारी

समय तुरत-फुरत बदलावों का है। इस बदलाव भरे समय में बनारस की जनता ने मंगलवार दोपहर और शाम के बीच के वक्फ़े में एक व्यापक और मौजूं खेल देखा। इस बदलाव ने हाल ही में राष्ट्रीय राजनीति में सकुचा-मिचमिचा कर उतरते बनारस को लगभग उस डर से मुक्त करने का साहस दिखाने की चेष्टा की, जिसमें यह शहर अपने भविष्य की ओर बड़ी चिंतित निगाह से देखता है। दृश्य में अकारण अंतर व्याप्त हो रहे हैं। इन अंतरों में बहुत सारा नागरिक दायित्व निभाना भी ज़रूरी है।

          दृश्य एक


          बेनियाबाग से लहुराबीर तक सारे वाहन सड़क की एक ही ओर से चल रहे हैं, ‘मैं हूं आम आदमी’, ‘मुझे चाहिए पूर्ण स्वराज’, बदलेगा अमेठी, बदलेगा देश’, ‘आम आदमी पार्टी ज़िन्दाबाद’ के नारों से साजी भीड़ दूसरी ओर चल रही है। पता चलता है कि अरविंद केजरीवाल मैदान की तरफ़ जा रहे हैं। सामने भारी माल ढोने वाली गाड़ी पर केजरीवाल, सिसोदिया, संजय सिंह, आनंद कुमार और दूसरे सदस्य सवार हैं। पूरी गाड़ी और आम आदमी पार्टी के शीर्ष दल के कपड़ों पर स्याही के गहरे निशान हैं।

          हम आगे बढ़ते हैं और आगे लगभग पच्चीस लड़के भगवे रंग में ‘जो बच न पाया खांसी से, वो क्या लड़ेगा काशी से’ की तख्तियां लेकर खड़े हैं। पता चलता है तो शक यकीन में बदल जाता है। वे भाजपा और भाजयुमो के कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने केजरीवाल के काफ़िले पर काली स्याही फेंकी है। तस्वीर आगे चल थोड़ी और साफ़ हो जाती है, जब सड़क पर अंड़ों के टुकड़े दिखाई दिए हैं, थोड़ी और जब कुछ काले झंडे सड़क पर फेंके दिखाई दे रहे हैं।

          उस जगह तैनात पुलिसवाले से बात होती है, तो बताते हैं कि उन्होंने ‘आप’ की टोपी पहने कुछ लोगों को मारा भी है, कुछ गाड़ियों के शीशे फोड़े हैं और आने-जाने वाले लोगों को मां-बहन की गालियां दे रहे हैं। हमने पूछा कि आपने कोई गिरफ़्तारी नहीं की, तो बोले कि इनके अध्यक्ष को गिरफ़्तार किया है, बाकी तो आप जानते ही हैं।

          दृश्य दो


          बेनियाबाग मैदान में मंच खुले आसमान में बना हुआ है। गाड़ी से टंगकर आए केजरीवाल एंड टीम भीड़ के बीच से होते हुए मंच पर आ गई है। मंच की कोई छत नहीं है और मंच की ऊंचाई सिर्फ़ इतनी कि औसत लंबाई का आदमी खड़ा हो तो गर्दन मंच के बराबर आएगी। इस तरह से यह जनसंपर्क रैली उन मुट्ठी भर रैलियों में शामिल हो जाती है, जहां वक्ता और जनता सभी धूप झेल रहे हैं। भीड़ के एक बड़े हिस्से में मुसलमान हैं, फ़िर उनके बाद दलित, मजदूर और अन्य पिछड़ी जाति के लोग हैं। बनारस के इमाम ने मंच से ऐलान कर दिया है कि मुफ्ती बोर्ड का सचिव होने के नाते मैं ये कहता हूं कि मुफ्ती बोर्ड तन-मन-धन से अरविंद केजरीवाल की मुहिम का हमसफर है। इमाम ने साफ़ किया है कि हिंदुस्तान जालिमों का नहीं है। यह हिंदू-मुस्लिम एकता का है। रोज़ी-रोटी-सफ़ाई का मसला बाद में है, पहला मसला अमन-ओ -आवाम का है। भीड़ इशारा समझने में कोई चूक नहीं कर रही है।

          संजय सिंह ने ‘थर-थर मोदी, घर-घर झाड़ू’ का नारा दे दिया है। उन्होंने याद दिलाया है कि अरविंद केजरीवाल ने जनलोकपाल की लड़ाई लड़ी। उसके लिए वादे किए और कहा कि नहीं पूरा कर पाया तो इस्तीफा दे दूंगा, इसलिए इन्होंने इस्तीफा दिया है। संजय सिंह ने अपील की है कि जाति-धर्म पर नहीं, मुद्दों पर वोट करिए। संजय सिंह ने ध्यान दिलाने की कोशिश की है कि कांग्रेस-भाजपा के सहयोगी दल और प्रदेश की प्रमुख पार्टियां सपा-बसपा बिना एजंडे के जाति-धर्म पर चुनाव कैसे जीत रही हैं। संजय सिंह ने राजनीति के परिवारों और परिवारों की राजनीति पर रोशनी फेंकी।

इसने दिवास्वप्न दिखाए हैं, यह सफल होने की पूरी तैयारी के साथ आया है
          मनीष सिसोदिया अंबानी पर निशाना साध रहे हैं। वो गैस के दामों में भाजपा-कांग्रेस की चालूपंती को दिखा रहे हैं। यह भी बताते चल रहे हैं 49 दिन के अंदर आम आदमी पार्टी ने क्या-क्या किया। उन्होंने बताया कि उनका इस्तीफ़ा देना भागना नहीं था। यह अपना वादा न निभा पाने का प्रायश्चित था।

          कुमार विश्वास ने साफ़ किया है ‘आप’ का प्रमुख एजंडा धर्म और जाति की राजनीति का बहिष्कार करना है। रैली स्थल तक के रास्ते में हुए हमलों पर चुटकी लेते हुए बता रहे हैं कि अमेठी से लड़ रहा हूं और अक्सर ऐसे छिटपुट हमलों का शिकार होता रहा हूं। विश्वास केजरीवाल को समझा रहे हैं कि अरविंद तुम्हारे पर पांच हमले हुए हैं, जब छ: हमले हो जाएँ तो मान लेना कि तुम राजनीति में घुस चुके हो। मौजूदा हालात पर बेहद संजीदा मजाक करते हुए कुमार विश्वास कह रहे हैं कि एक हमारे प्रधानमंत्री हैं, जो मानते नहीं कि मैं हूँ और एक भाजपा का उम्मीदवार है, जो मान के बैठा है कि मैं ही हूं। भाजपा के पुरनियों की हालत पर तंज़ कसते हुए कुमार विश्वास कह रहे हैं कि भाजपा की हालत ऐसी है कि बारात उठी नहीं और फूफा नाराज़ हो गए। कुमार विश्वास ललकारते हुए बात करते हैं, वे बीच-बीच में उर्दू ज़बां में कलमें पढ़ दे रहे हैं। भीड़ लहलहा उठ रही है। वे उद्धव ठाकरे को ललकार रहे हैं कि वे सामना में लिखें कि शिवसेना उत्तर भारतीयों पर हमले नहीं करेगी तो अरविंद केजरीवाल मोदी को जीतने देंगे। अपनी पारी खत्म करते-करते वे काशी की जनता से एक बड़ी अपील करके जा रहे हैं, वे उनसे मोदी से पूछने को कह रहे हैं कि क्या उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद भी यदि शिवसेना ऐसे हमले जारी रखती है, तो क्या वे सरकार बचाएंगे या आप लोगों को, मासूम जनता अभी हां कर रही है, लेकिन सभी जानते हैं कि मोदी के आने के बाद इन्हें कोई नहीं पूछेगा।

          अब केजरीवाल हैं, जो रास्ते में स्याही फेंकने वाले लोगों के बारे में बता रहे हैं कि भाड़े के टट्टओं से भाजपा चुनाव लड़ रही है। वे पूछ रहे हैं क्या कांग्रेस और भाजपा ने कभी एक दूसरे को काले झंडे दिखाए या स्याही फेंकी। वे कह रहे हैं कि कमलापति त्रिपाठी के बाद बनारस का विकास रुक गया। मीडिया पर पुन: निशाना साधते हुए वे कह रहे हैं कि ‘कुछ’ मीडिया वाले प्रचार कर रहे हैं कि गुजरात में विकास बहुत है, लेकिन ये सरासर षड्यंत्र है, यह अरविंद केजरीवाल की अब तक की सभी रैलियों का निचोड़ है। यहां केजरीवाल ने कोई मुरव्वत नहीं बरती है। उन्होंने साफ़ कर दिया है कि वे सेफ सीट का खेल नहीं खेल रहे हैं। वे लड़ने आए हैं और लड़कर जीतेंगे। जीतकर भागने वालों के साथ उनका नाम न रखा जाए। स्विस बैंक खातों के नंबर सार्वजनिक कर दिए हैं। गुजरात के विकास मॉडल का काला सच उजागर कर दिया है। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस का असली चेहरा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। गुजरात में सबसिडी की पोल खोल दी है। जनता को सा़फ़-साफ़ बता दिया है कि इनको वोट करेंगे तो क्या होगा। जनता यह पसंद कर रही है। यह ‘वन मैन शो’ है।

          इन आरोपों के साथ केजरीवाल को लड़ना है कि उन्होंने दिल्ली चुनाव बांग्लादेशियों और विदेशी पैसों के बल पर जीता है या सोमनाथ भारती ने लड़कियों के साथ बदतमीज़ी की है। लेकिन सनद रहे कि वर्तमान में यह भारतीय लोकतंत्र की अकेली ऐसी पार्टी है जिसके दामन पर किसी खून, दंगे या हिंसा के दाग नहीं हैं। केजरीवाल के पास एक व्यक्ति भी ऐसा नहीं है, जिसकी जिह्वा कुशलता नरेंद्र मोदी या दिग्विजय सिंह जैसी हो। लेकिन कयासों के विपरीत अरविंद केजरीवाल ने बनारस में ‘आप’ के लिए कुछ खड़ा तो किया है, अब वह जनाधार बनता है या नहीं वह तो वक्त ही बता पाएगा। लेकिन एक बात साफ़ है इसने दिवास्वप्न दिखाए हैं, यह सफल होने की पूरी तैयारी के साथ आया है।
साभार जनसत्ता 26.3.14
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