गुलज़ार - खाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो? #Gulzar Nazm - Khali Kagaz...

खाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो?

गुलज़ार


खाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो?
एक ख़ामोश-सा जवाब तो है।

डाक से आया है तो कुछ कहा होगा
"कोई वादा नहीं... लेकिन
देखें कल वक्त क्या तहरीर करता है!"

या कहा हो कि... "खाली हो चुकी हूँ मैं
      अब तुम्हें देने को बचा क्या है?"



सामने रख के देखते हो जब
सर पे लहराता शाख का साया
हाथ हिलाता है जाने क्यों?
कह रहा हो शायद वो...
"धूप से उठके दूर छाँव में बैठो!"

सामने रौशनी के रख के देखो तो
सूखे पानी की कुछ लकीरें बहती हैं

"इक ज़मीं दोज़ दरया, याद हो शायद
   शहरे मोहनजोदरो से गुज़रता था!"

उसने भी वक्त के हवाले से
उसमें कोई इशारा रखा हो... या
उसने शायद तुम्हारा खत पाकर
सिर्फ इतना कहा कि, ''लाजवाब हूँ मैं!''
बोस्कियाना, 
पाली हिल, बान्द्रा (पश्चिम), मुम्बई-400050 साभार नया ज्ञानोदय
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

4 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार : विजयश्री तनवीर : लोकल ट्रेन, मातृत्व और एक अधूरी मोहब्बत की मार्मिक कहानी
चाइल्ड इज़ द फ़ादर ऑफ़ मैन | वंदना राग | सरकफंदा उपन्यास अंश
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
महादेवी वर्मा की कहानी बिबिया Mahadevi Verma Stories list in Hindi BIBIYA
 प्रत्यक्षा के उपन्यास शीशाघर पर राजीव कुमार का गहन पाठ
असग़र वजाहत : श्रेष्ठ साहित्य मुद्दों की पहचान से ही नहीं बनता
एक चुनाव और क़िस्मत की दो चाबियाँ! - क़मर वहीद नक़वी | Qamar Waheed Naqvi on Election 2014
परिन्दों का लौटना: उर्मिला शिरीष की भावुक प्रेम कहानी 2025
मालिनी अवस्थी लाइव : नयन की मत मारो तलवरिया @maliniawasthi