कैलाश वाजपेयी एक मनमौजी साहित्यकार थे - कमल किशोर गोयनका | Kamal Kishore Goenka on Kailash Vajpaayee's Death


कैलाश वाजपेयी एक मनमौजी साहित्यकार थे

कमल किशोर गोयनका


कैलाश वाजपेयी मुझ से थोड़े ही बड़े थे, लेकिन कविता में निरंतर 50 वर्षो की उनकी साधना अप्रतिम है. वो दार्शनिक थे - भारतीय संस्कृति के प्रति उनका गहरा लगाव था. कैलाशजी एक मनमौजी साहित्यकार थे और उनका किसी भी तरह की राजनीति से कभी कोई सरोकार नहीं रहा. कैलाश वाजपेयी का जाना हिंदी कविता की बहुत बड़ी क्षति है. उनकी आत्मा को मेरी हार्दिक श्रधांजलि.

nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani
अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
Hindi Story: दादी माँ — शिवप्रसाद सिंह की कहानी | Dadi Maa By Shivprasad Singh
Book Review: मानस का हंस की आलोचना — विशाख राठी
शिवानी की कहानी — नथ | 'पिछली सदी से जारी स्त्री स्वाधीनता की खामोश लड़ाई' - मृणाल पाण्डे
मन्नू भंडारी की कहानी — 'रानी माँ का चबूतरा' | Manu Bhandari Short Story in Hindi - 'Rani Maa ka Chabutra'
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
बिहारियों का विस्थापन: ‘समय की रेत पर’ की कथा