लघुकथा — खेल बनाम साहित्य — रमेश यादव Laghu Katha in Hindi



Laghu Katha in Hindi 

Sports Vs Literature : Ramesh Yadav

Sports Vs Literature : Ramesh Yadav


मुंबई के आपा-धापी भरे जीवन में भी किसी तरह लोग अपने लिए थोड़ा सा जीवन तो चुरा ही लेते हैं। कुमार टिपिकल मुंबईया के साथ-साथ एक प्रोफेशनल बैंकर भी है। लिखना उसका पैशन है। वह अखबार का इंतजार कर रहा था। आज उसे किसी खास न्यूज का इंतजार था। अखबार मिलते ही पन्ने पलटते हुए सरसरी नजर से उस लंबी लिस्ट में उसने अपना नाम ढूँढ ही लिया। “थँक्यू ग़ॉड” कहते हुए उसने अखबार चूम लिया। उसके खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उसके उपन्यास को राज्य साहित्य अकादमी का प्रथम पुरस्कार घोषित किया गया था।



बगल में छपी एक और न्यूज कुमार को आकर्षित कर रही थी, क्रिकेट खिलाडी़ व्यंकटेश को नॅशनल अवार्ड मिलने पर उसके बैंक ने उसे प्रमोट करके मॅनेजर बना दिया था, ताकि वह और समर्पित भावना से खेलता रहे और बैंक का नाम रोशन करता रहे।

पुरस्कार मिलते ही वह अपने बैंक के महाप्रबंधक से मिलने गया। केबिन के सामने मिठाई, फोटो और न्यूज लेकर वह अपनी बारी का इंतजार करता रहा। सामने एक बडी़-सी तस्वीर लगी थी, जिसमे साहब “सी।एम।डी।” से पुरस्कार लेते हुए मुस्कुरा रहे थे। बगल में एक पोस्टर लगा था - मुंबई सर्कल ने इस वर्ष पाँच लाख करोड़ का बिजनेस टारगेट पूरा कर लिया। टारगेट पूरा करने पर प्रमोशन तो तय था। साथ ही इंस्यूरेंस व्यापार पर कमीशन और विदेश टूर अलग से। खैर..........! यह सोचते हुए कुमार अंदर गया और अपनी सबसे प्रिय खबर साहब को सुनाई साथ ही मिठाई आगे कर दी।

साहब ने “कॉग्रेट्स” करते हुए पूछा, “व्हाट इज धीस साहिट्य अकादेमी ? इज इट हिन्दी अवार्ड ?” कुमार ने समझाया, न्यूज और फोटो भी दिखाया। “ओह दॅट मिन्स यू आर अ राइटर ? आर यू रायटिंग इन बैंकिंग आवर आल्सो ?” “नो सर, नॉट एट आल, लिखना इतना आसान काम नहीं होता। इट्स नॉट पासिबल सर !” कुमार ने जवाब दिया। साहब की इस सोच पर उसे तरस आ गई। “ वेदर बैंक इज गोइंग टू गेट एनी बेनीफिट्स फ्रॉम धीस ?” कुमार को लगा जैसे किसी ने उसे तमाचा जड़ दिया हो ! पर अपने को संभालते हुए किसी तरह से उसने साहब को समझाया, “ सर, राज्य स्तर का यह बड़ा ही अहम और सम्मानजनक पुरस्कार है, जो जीवन में शायद ही कभी–कभार मिलता है। मेरे इस पुरस्कार से बैंक का भी नाम रोशन हुआ है सर”। मगर साहब के चेहरे पर कोई खास प्रभाव दिखाई नहीं दिया। मुँह फेरकर वे फाइलों में पुन: व्यस्त हो गए।

कुमार चलने लगा, अचानक वह मु्ड़कर बोला, “सर ! साहित्य और संस्कृति को लेकर प्रोत्साहन, पदोन्नति, विशेष छुट्टी, जैसी कोई गाईडलाइन सरकारी, अर्ध सरकारी महकमों में नहीं है, जो कि खिलाड़ियों को प्राप्त हैं। अन्यथा आप इस तरह से पेश नहीं आते ! राष्ट्र और राज्य के उत्थान में साहित्य और संस्कृति का भी बड़ा अहम योगदान होता है। साहित्य से जुड़े कर्मचारी अपनी नौकरी की जिम्मेदारियों को संभालते हुए देश, दुनिया, समाज, और अपनी संस्था का नाम तो रोशन करते ही हैं, साथ ही समाज को दिशा देते हैं, और आईना भी दिखाते हैं। इस पुरस्कार ने बैंक के लिए इमेज बिल्डिंग का काम किया है, जिसके लिए बैंक करोड़ो रुपए खर्च करती है। आप इस बात को नहीं समझेंगे ! या फिर समझना नही चाहते सर ! मगर एक दिन ऐसा जरूर आयेगा जब आप जैसे लोगो को अपनी इस सोच को बदलनी पड़ेगी। एक दिन हिंदी की कलम भी जागेगी जो अपना अधिकार लेकर रहेगी। और केबिन का दरवाजा खोलकर कुमार सीधे बाहर निकल गया।

रमेश यादव
481-161 – विनायक वासुदेव एन.एम. जोशी मार्ग,
चिंचपोकली – पश्चिम ,
मुंबई- 400011
फोन- 09820759088
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
००००००००००००००००
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
भवतु सब्ब मंगलं  — सत्येंद्र प्रताप सिंह | #विपश्यना
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
लिहाफ़ - इस्मत चुगताई की कहानी | Lihaf by Ismat Chugtai
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
 प्रत्यक्षा के उपन्यास शीशाघर पर राजीव कुमार का गहन पाठ
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
परिन्दों का लौटना: उर्मिला शिरीष की भावुक प्रेम कहानी 2025
बिहारियों का विस्थापन: ‘समय की रेत पर’ की कथा
शाकाहार बनाम माँसाहार जिरह के अर्धसत्य — मृणाल पाण्डे #MrinalPande