advt

तीन ग़ज़लें और कई ख़याल - प्राण शर्मा | Three Ghazals of Pran Sharma

जुल॰ 4, 2014

कुछ  तो  जानें ,  कुछ  तो   मानें  अपनी  उस   नादानी  को 
कैसे   खोया   हम    ने    अपने  घर  के   दाना - पानी  को 

अपने  को  पहचान  न  पाये , जान  न  पाये  हम  खुद  को 
पूजते  रह  गए  सदियों - सदियों हम  तो  राजा -  रानी  को 

कब  तक  धोखा   देते   रहेंगे   अपने    को   या   औरों  को 
कब   तक   साथ    चलेंगे   लेकर    अपनी    बेईमानी   को 

यूँ   तो   मनमानी   की  फ़ितरत   सब  में  पायी   जाती  है 
हर    कोई    लेकिन    दुत्कारे    दूजे   की   मनमानी    को 

जिसकी  मीठी  बानी   में  जो  रोज़  ही  सुनता   था  किस्से 
क्यों   न  याद  करे  वो  अपनी  प्यारी - प्यारी    नानी  को 

जिस की जितनी `प्राण` पहुँच  थी उस ने उतना साथ दिया 
छोटा  और   बड़ा  मत   समझो   ज्ञानी  को  या  दानी  को 

◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘


शहरों  में  इस   बात  की  चर्चा  करानी चाहिए 
चुगली   करने  वालों  से  दूरी   बनानी  चाहिए 

वो   मरा तो  समझियेगा ज़िंदगी  भी  मर गई 
ज़िंदा   मेरे   दोस्तो   आँखों  का  पानी  चाहिए 

हो  न  अपने  से  किसी का  बैर  कोई राम जी 
हर किसी पर हर  किसी की  मेहरबानी चाहिए 

सोचता हूँ , हर किसी के अच्छे कामों  के  लिए 
हर  किसी  को  प्यार  से ताली  बजानी चाहिए 

पढ़ने वालों को दिखें अपनी ही उसमें  झाँकियाँ 
लिखने वाले, कुछ न कुछ ऐसी कहानी चाहिए 

काम  आती  हैं   हमेशा  मुश्किलों  में  दोस्तो 
हौसलों   की  बातें   भेजे   में  समानी   चाहिए 

दुःख में भी वो हर घड़ी आये नज़र हँसती हुयी 
हर  किसी की `प्राण` ऐसी  ज़िंदगानी  चाहिए 

◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘


कोई  शै  दिल  को  तब  भाती  नहीं है 
मुसीबत  आ  के  जब  जाती  नहीं  है 

भले  ही  उस  से  है  रौनक  गगन की 
वो गुडडी  क्या जो बल  खाती नहीं  है 

कई   करते  हैं  उस  से  तौबा -  तौबा 
सभी  को  यारी   रास  आती  नहीं  है 

बड़ी  निर्लज्ज  जानो  मौत  को  तुम 
कभी   आने   से   कतराती   नहीं   है 

न  इतना  नाज़  कर  दौरे  खुशी  पर 
मुसीबत  बात पूछ कर आती नहीं है 

◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘◘
१३ जून १९३७ को वजीराबाद में जन्में, श्री प्राण शर्मा ब्रिटेन मे बसे भारतीय मूल के हिंदी लेखक है। दिल्ली विश्वविद्यालय से एम ए बी एड प्राण शर्मा कॉवेन्टरी, ब्रिटेन में हिन्दी ग़ज़ल के उस्ताद शायर हैं। प्राण जी बहुत शिद्दत के साथ ब्रिटेन के ग़ज़ल लिखने वालों की ग़ज़लों को पढ़कर उन्हें दुरुस्त करने में सहायता करते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि ब्रिटेन में पहली हिन्दी कहानी शायद प्राण जी ने ही लिखी थी।
देश-विदेश के कवि सम्मेलनों, मुशायरों तथा आकाशवाणी कार्यक्रमों में भाग ले चुके प्राण शर्मा जी  को उनके लेखन के लिये अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं और उनकी लेखनी आज भी बेहतरीन गज़लें कह रही है।


प्राण शर्मा
3 Crackston Close, Coventry, CV2 5EB, UK

टिप्पणियां

  1. सहज, सरल आम आदमी की भाषा के गज़लकार ... सामाजिक सरोकार लिए हर किसी के दिल की बात सहज ही कह देने की कला है प्राण जी के हाथ में ... तीनों गजलें लाजवाब दिल में सीधेर घेर करती हुयी ...

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी तीनों रचनाओं ने बेहद प्रभावित किया है मन को अच्छा लगा इनको पढ़ते हुए,आपकी हर रचना बहुत कुछ कह जाती है,बधाई.

    जवाब देंहटाएं
  3. प्राण शर्मा जी को जब जब पढती हूँ निशब्द हो जाती हूँ ……………सहज सरल भाषा में ज़िन्दगी को उतारना कोई उनसे सीखे ………एक एक शेर दिल को छू जाता है ………लाजवाब प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  4. प्रिय देवमणि जी ,



    ` कब तक देते रहेंगे धोखा ` में भी तो ` ते ` की मात्रा गिरती है



    कब तक धोखा देता रहेंगे के दूसरे मिसरे को देखिये



    कब तक साथ चलेंगे लेकर



    ` धोखा ` और ` साथ ` उपयुक्त स्थान पर आने से ही लय में वृद्धि हुयी है।



    तख़ल्लुस मिसरे के शुरू , मध्य या अंत में इस्तेमाल हो , कोई अंतर नहीं पड़ता



    नहीं पड़ता , मक़्ता में स्पष्टता होनी चाहिए।



    देखिये , आनंद नारायण ` मुल्ला ` की ग़ज़ल का मक़्ता है -



    हमने भी ` मुल्ला ` को समझाने को समझाया मगर

    चोट सी लगती है दिल में उसको समझाते हुए



    अगर ` मुल्ला ` साहिब यूँ भी लिखते तो सही था -



    ` मुल्ला ` को हमने भी समझाने को समझाया मगर

    चोट सी लगती है दिल में उसको समझाते हुए





    दोनों बयान सही हैं क्योंकि कहीं भी अस्पष्टता नहीं उनमें और लय बरक़रार है



    मैं हमेशा इस बात का क़ायल रहा हूँ कि शे`र साफ़ - सुथरा होना चाहिए। पाठक



    को मगज़पच्ची नहीं करनी पड़े।



    मुझे एक बच्चे का मश्वरा भी सुकून देता है।



    रात को मैं आपका ` रफ़्ता - रफ़्ता --- ` वाला शे`र गुनगुनाता रहा था। मेरी



    मानिए , इसको यूँ कीजिये -



    रफ़्ता - रफ़्ता अपने सारे पेंच ढीले हो गए - कहिये



    ज़िंदगी को बहुत इस्तेमाल कर लिया है शायरों ने।

    जवाब देंहटाएं
  5. प्रिय देवमणि जी ,



    ` कब तक देते रहेंगे धोखा ` में भी तो ` ते ` की मात्रा गिरती है



    कब तक धोखा देता रहेंगे के दूसरे मिसरे को देखिये



    कब तक साथ चलेंगे लेकर



    ` धोखा ` और ` साथ ` उपयुक्त स्थान पर आने से ही लय में वृद्धि हुयी है।



    तख़ल्लुस मिसरे के शुरू , मध्य या अंत में इस्तेमाल हो , कोई अंतर नहीं पड़ता



    नहीं पड़ता , मक़्ता में स्पष्टता होनी चाहिए।



    देखिये , आनंद नारायण ` मुल्ला ` की ग़ज़ल का मक़्ता है -



    हमने भी ` मुल्ला ` को समझाने को समझाया मगर

    चोट सी लगती है दिल में उसको समझाते हुए



    अगर ` मुल्ला ` साहिब यूँ भी लिखते तो सही था -



    ` मुल्ला ` को हमने भी समझाने को समझाया मगर

    चोट सी लगती है दिल में उसको समझाते हुए





    दोनों बयान सही हैं क्योंकि कहीं भी अस्पष्टता नहीं उनमें और लय बरक़रार है



    मैं हमेशा इस बात का क़ायल रहा हूँ कि शे`र साफ़ - सुथरा होना चाहिए। पाठक



    को मगज़पच्ची नहीं करनी पड़े।



    मुझे एक बच्चे का मश्वरा भी सुकून देता है।



    रात को मैं आपका ` रफ़्ता - रफ़्ता --- ` वाला शे`र गुनगुनाता रहा था। मेरी



    मानिए , इसको यूँ कीजिये -



    रफ़्ता - रफ़्ता अपने सारे पेंच ढीले हो गए - कहिये



    ज़िंदगी को बहुत इस्तेमाल कर लिया है शायरों ने।

    जवाब देंहटाएं
  6. मुसीबत बात पूछ कर आती नहीं है

    आदरणीय प्राण जी , आपकी इस एक लाइन पर सौ गज़ले कुर्बान . बस यही तो ज़िन्दगी की सबसे बड़ी सच्चाई है . और आपकी गज़ले तो हमेशा ही दिल के करीब होती है .
    शुक्रिया सर . और आपके लेखन को सलाम .
    आपका अपना
    विजय

    जवाब देंहटाएं
  7. सभी गज़लें बेहतरीन. हर एक शेर में ज़िन्दगी से जुडी बातें... जो सीधे दिल तक पहुँचती हैं. बहुत खूब. प्राण शर्मा जी को बधाई.

    जवाब देंहटाएं

टिप्पणी पोस्ट करें

ये पढ़े क्या?

{{posts[0].title}}

{{posts[0].date}} {{posts[0].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[1].title}}

{{posts[1].date}} {{posts[1].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[2].title}}

{{posts[2].date}} {{posts[2].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[3].title}}

{{posts[3].date}} {{posts[3].commentsNum}} {{messages_comments}}

ये कुछ आल टाइम चर्चित

कहानी: दोपहर की धूप - दीप्ति दुबे | Kahani : Dopahar ki dhoop - Dipti Dubey

अरे! देखिए वो यहाँ तक कैसे पहुंच गई... उसने जल्दबाज़ी में बाथरूम का नल बंद कि…

जनता ने चरस पी हुई है – अभिसार शर्मा | Abhisar Sharma Blog #Natstitute

क्या लगता है आपको ? कि देश की जनता चरस पीए हुए है ? कि आप जो कहें वो सर्व…

मुसलमान - मीडिया का नया बकरा ― अभिसार शर्मा #AbhisarSharma

अभिसार शर्मा का व्यंग्य मुसलमान - मीडिया का नया बकरा …

गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvellous Poems

गुलज़ार की 10 बेहतरीन कविताएं! जन्मदिन मनाइए: पढ़िए नज़्म छनकती है...  गीतका…

मन्नू भंडारी: कहानी - अकेली Manu Bhandari - Hindi Kahani - Akeli

अकेली (कहानी) ~ मन्नू भंडारी सोमा बुआ बुढ़िया है।  …

कहानी "आवारा कुत्ते" - सुमन सारस्वत

रेवती ने जबरदस्ती आंखें खोलीं। वह और सोना चाहती थी। परंतु वॉर्ड के बाहर…

चतुर्भुज स्थान की सबसे सुंदर और महंगी बाई आई है

शहर छूटा, लेकिन वो गलियां नहीं! — गीताश्री आखिर बाईजी का नाच शुर…

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani

premchand ki kahani  प्रेमचंद के फटे जूते premchand ki kahani — …

अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika

अनामिका की कवितायेँ   Poems of Anamika …

कायरता मेरी बिरादरी के कुछ पत्रकारों की — अभिसार @abhisar_sharma

मैं सोचता हूँ के मोदीजी जब 5, 10 या 15 साल बाद देश के प्रधानमंत्री नहीं …

साल दर साल

एक साल से पढ़ी जाती हैं

कहानी "आवारा कुत्ते" - सुमन सारस्वत

रेवती ने जबरदस्ती आंखें खोलीं। वह और सोना चाहती थी। परंतु वॉर्ड के बाहर…

चतुर्भुज स्थान की सबसे सुंदर और महंगी बाई आई है

शहर छूटा, लेकिन वो गलियां नहीं! — गीताश्री आखिर बाईजी का नाच शुर…

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani

premchand ki kahani  प्रेमचंद के फटे जूते premchand ki kahani — …

हिंदी कहानी : उदय प्रकाश — तिरिछ | uday prakash poetry and stories

उदय प्रकाश की कहानी  तिरिछ  तिरिछ में उदय प्रकाश अपने नायक से कहल…

मन्नू भंडारी: कहानी - अकेली Manu Bhandari - Hindi Kahani - Akeli

अकेली (कहानी) ~ मन्नू भंडारी सोमा बुआ बुढ़िया है।  …

गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvellous Poems

गुलज़ार की 10 बेहतरीन कविताएं! जन्मदिन मनाइए: पढ़िए नज़्म छनकती है...  गीतका…

हिन्दी सिनेमा की भाषा - सुनील मिश्र

आलोचनात्मक ढंग से चर्चा में आयी अनुराग कश्यप की दो भागों में पूरी हुई फिल…

अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika

अनामिका की कवितायेँ   Poems of Anamika …

महादेवी वर्मा की कहानी बिबिया Mahadevi Verma Stories list in Hindi BIBIYA

बिबिया —  महादेवी वर्मा की कहानी  mahadevi verma stories list in hind…