फाल्गुनी मुक्तक - अरविन्द कुमार 'साहू'


अरविन्द कुमार 'साहू'
खत्री मोहल्ला, ऊंचाहार
राय बरेली - 229404

फाल्गुनी मुक्तक

(1)
कहीं अपना सा लगे ,कहीं पराया फागुन ।
आम के बौर सा फिर झूम के आया फागुन ।
काग की अनसुनी है ,कन्त नहीं लौटा है,
विरह के अश्रु में विरहिन का नहाया फागुन ।।
(2)
फूल टेसू के हुए आग ,जब आया फागुन ।
holi greetings shabdankan 2013 २०१३ होली की शुभकामनायें शब्दांकन किसी विरहिन के जगे भाग जब आया फागुन ।
फिर किसी राधा को कान्हा की आस जागी है,
मधुर मिलन के छिडे राग जब आया फागुन ।।
(3)
मिठास घोल कर रिश्तों में ,ले आता फागुन ।
भेद अपने - पराये का भी मिटाता फागुन ।
भूल कर लाज - शरम हर कोई बौराया है,
गोरी की उँगली पर ,बाबा को नचाता फागुन ।।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
जयश्री रॉय और प्रमोद राय को 'राजेंद्र यादव हंस कथा सम्मान' 2020-21
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
हिन्दी कहानी 'अज़ाब' - विजयश्री तनवीर | Vijayshree Tanveer - Hindi Story - Azab
गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvelous Poems
Hindi Story: दादी माँ — शिवप्रसाद सिंह की कहानी | Dadi Maa By Shivprasad Singh
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
परिन्दों का लौटना: उर्मिला शिरीष की भावुक प्रेम कहानी 2025
कहानी कैसे लिखें — कहानी के तत्व — रोहिणी अग्रवाल
 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani