advt

सोच कर जवाब देना

अप्रैल 20, 2013
बेचैनी है. सही गलत के पैमाने, जो खुद बनाये, उन पर भी शक है.

समझ नहीं आता कि पांच साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने वाला, पकड़ तो लिया गया, लेकिन ऐसी विक्षिप्त मानसिकता रखने वाला क्या वो आख़िरी इन्सान था ?

बेचैनी इस बात की है कि वो आख़िरी नहीं है, कि और कितने हैं जो अभी इस वक़्त, दुनिया के किसी हिस्से में, या तो ये दुष्कर्म कर रहे होंगे, या करने वाले होंगे.

  ये बात भी परेशान कर रही है कि क्या ये पहली बार ही हुआ है या फिर पहले (या अब भी) दो-हज़ार-रूपये ने ऐसी घटना के होने को, न होना, करा है.

बहरहाल इस बेचैन दिमाग ने ये भी सोचा कि पुलिस इसमें क्या कर सकती है ? मतलब कैसे रोक सकती है ? ना. नहीं रोक सकती. क्या मैं रोक सकता हूँ या फिर आप ? या कोई सरकार या विपक्ष या आन्दोलन ?

गुस्सा आता है ये देख कर कि बहस पर बहस, इस बात पर होती है कि ये प्रशासन की नाकामी है. शर्म आती है ऐसी घटनाओं पर किसी नेता को अपनी राजनीति करते देख.

और ये कहते हुए हिचक नहीं होती कि हम फिर भूल जायेंगे कि ये हुआ था. अगर आप की सोच ये नहीं कहती तो फिर आखिर दिल्ली में खेल के नाम पर लूट कैसे भूल गये आप, या फिर कश्मीर से विस्थापित लोग क्यों विस्थापित हुए , पता करा ? वहाँ भी तो पांच साल के बच्चे रहे होंगे . ये बातें करना शुरू करी तो ख़त्म नहीं होंगी , करी इसलिए की – ये बात सच है कि आप फिर भूल जायेंगे.

ये भूलना ही कारण है, इन घटनाओं का, क्योंकि भूल जाते हो कि देश जब विभाजित हुआ तो खून नालियों में बहा – इसलिए खून फिर बहता है कभी दिल्ली में चौरासी होता है, कभी गुजरात में...

भूल जाते हो कि चारा पशु ने नहीं खाया , इसलिए रोज़ एक घोटाला होता है, आप बहस करते हो, गलियां देते हो. रोज़. लेकिन कल किसको गाली दी थी याद है ? और परसों ....

भूल जाते हो रंगा-बिल्ला को और फिर किसी नयी घटना पर सीना पकड़ कर बैठ जाते हो.


एक बात बोलो – सोच कर जवाब देना – क्या ऐसा नहीं लगता कि आप ये सब बातें भूलना नहीं चाहते थे ? लगता है ना ? तो फिर आखिर ऐसा होता क्यों है ... ऐसा कही इसलिए तो नहीं होता कि कोई आपसे ये सब भुलावा देता हो कि राजनीति के हमाम में जब सब नहाते हों तो “भूलवाने की राजनीति” तय करते हों ? फिर बाहर निकल कर अपनी अपनी टोपी लगा कर, हमें आपको कुछ ऐसा परोस देते हैं कि हम भूल जाते हैं...

बंद करो इस भूलने की आदत को, डर डर के रहना है तो फिर रोते क्यों हो ? डर छोड़ो, ये सब जाती-वाती का, स्त्री-पुरुष का, आरक्षण-वारक्षण का खाना जो तुम्हे रोज़ नयी थाली में नया बेयरा परोसता है, इसमें भूलने की दवा मिली होती है... जब तक ये खाते रहोगे, जिंदा मरते रहोगे (मारे जाते रहोगे).

भरत तिवारी

टिप्पणियां

ये पढ़े क्या?

{{posts[0].title}}

{{posts[0].date}} {{posts[0].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[1].title}}

{{posts[1].date}} {{posts[1].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[2].title}}

{{posts[2].date}} {{posts[2].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[3].title}}

{{posts[3].date}} {{posts[3].commentsNum}} {{messages_comments}}

ये कुछ आल टाइम चर्चित

कहानी: दोपहर की धूप - दीप्ति दुबे | Kahani : Dopahar ki dhoop - Dipti Dubey

अरे! देखिए वो यहाँ तक कैसे पहुंच गई... उसने जल्दबाज़ी में बाथरूम का नल बंद कि…

जनता ने चरस पी हुई है – अभिसार शर्मा | Abhisar Sharma Blog #Natstitute

क्या लगता है आपको ? कि देश की जनता चरस पीए हुए है ? कि आप जो कहें वो सर्व…

मुसलमान - मीडिया का नया बकरा ― अभिसार शर्मा #AbhisarSharma

अभिसार शर्मा का व्यंग्य मुसलमान - मीडिया का नया बकरा …

गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvellous Poems

गुलज़ार की 10 बेहतरीन कविताएं! जन्मदिन मनाइए: पढ़िए नज़्म छनकती है...  गीतका…

मन्नू भंडारी: कहानी - अकेली Manu Bhandari - Hindi Kahani - Akeli

अकेली (कहानी) ~ मन्नू भंडारी सोमा बुआ बुढ़िया है।  …

कहानी "आवारा कुत्ते" - सुमन सारस्वत

रेवती ने जबरदस्ती आंखें खोलीं। वह और सोना चाहती थी। परंतु वॉर्ड के बाहर…

चतुर्भुज स्थान की सबसे सुंदर और महंगी बाई आई है

शहर छूटा, लेकिन वो गलियां नहीं! — गीताश्री आखिर बाईजी का नाच शुर…

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani

premchand ki kahani  प्रेमचंद के फटे जूते premchand ki kahani — …

अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika

अनामिका की कवितायेँ   Poems of Anamika …

कायरता मेरी बिरादरी के कुछ पत्रकारों की — अभिसार @abhisar_sharma

मैं सोचता हूँ के मोदीजी जब 5, 10 या 15 साल बाद देश के प्रधानमंत्री नहीं …

साल दर साल

एक साल से पढ़ी जाती हैं

कहानी "आवारा कुत्ते" - सुमन सारस्वत

रेवती ने जबरदस्ती आंखें खोलीं। वह और सोना चाहती थी। परंतु वॉर्ड के बाहर…

चतुर्भुज स्थान की सबसे सुंदर और महंगी बाई आई है

शहर छूटा, लेकिन वो गलियां नहीं! — गीताश्री आखिर बाईजी का नाच शुर…

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani

premchand ki kahani  प्रेमचंद के फटे जूते premchand ki kahani — …

हिंदी कहानी : उदय प्रकाश — तिरिछ | uday prakash poetry and stories

उदय प्रकाश की कहानी  तिरिछ  तिरिछ में उदय प्रकाश अपने नायक से कहल…

मन्नू भंडारी: कहानी - अकेली Manu Bhandari - Hindi Kahani - Akeli

अकेली (कहानी) ~ मन्नू भंडारी सोमा बुआ बुढ़िया है।  …

गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvellous Poems

गुलज़ार की 10 बेहतरीन कविताएं! जन्मदिन मनाइए: पढ़िए नज़्म छनकती है...  गीतका…

हिन्दी सिनेमा की भाषा - सुनील मिश्र

आलोचनात्मक ढंग से चर्चा में आयी अनुराग कश्यप की दो भागों में पूरी हुई फिल…

अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika

अनामिका की कवितायेँ   Poems of Anamika …

महादेवी वर्मा की कहानी बिबिया Mahadevi Verma Stories list in Hindi BIBIYA

बिबिया —  महादेवी वर्मा की कहानी  mahadevi verma stories list in hind…