सेल्फ पोर्ट्रेट से सेल्फी तक | Self-Portrait to Selfie


सेल्फ पोर्ट्रेट से सेल्फी तक | Self-Portrait to Selfie

"Self-Portrait to Selfie : Redefining Image Making"

Photography workshop by Parthiv Shah

‘सेल्फी’, 2013 में ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी ने इसे ‘वर्ड ऑफ़ द इयर’ घोषित किया था. स्वचित्रण का यह सिलसिला दस-एक वर्षों से, फ़ोटो खींचने-खिंचाने के दौर में, लगातार चरम पर है... इसमें जनसाधारण, मशहूर हस्तियां और राजनेता आदि सभी शामिल हैं. ‘ऐज ऑफ़ सेल्फी’ यानी ‘स्वचित्र का दौर’ तकनीकी में आये ज़बरदस्त बदलाव और सोशल मीडिया के बढ़े हुए दायरे का नतीजा लगता है... जब एक स्मार्ट फ़ोन बस एक फ़ोन नहीं बल्कि कैमरा, विडियो कैमरा, किताब, नक्शा, कैलकुलेटर, कंप्यूटर, घड़ी, कैलंडर और कितना कुछ बन हमारी ज़ेब में पहुँच गया है... मगर सनद रहे की स्वचित्र, सेल्फ पोर्ट्रेट की प्राचीन शैली का ही आधुनिक रूप है.

सेल्फ पोर्ट्रेट की शुरआत मध्य युग में चित्रकला के साथ शुरू हुई दिखती है। जहाँ ये अधिकार, आत्मचेतना, ख़ुद की पड़ताल और शायद अपनी ज़िन्दगी को दर्ज करने का साधन बनती है. 15वीं शताब्दी में बड़े परिमाण के चित्रकार रेम्ब्रांट से लेकर विक्षिप्तता को छूती आधुनिकतावादी वैन गॉग और एडवर्ड मंच से होती हुए सेल्फ पोर्ट्रेट ने फ़ोटोग्राफ़ी की दुनिया में भी प्रवेश कर ही लिया.

तस्वीर खींचने और उसे साझा करने की सहज उपलब्ध सुविधा के समय में ज़रुरत है कि फ़ोटोग्राफ़ी-कला पर चर्चा की जाये. पिछली सदी से शुरू हुए सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए की जाने वाली वर्कशॉप में आपसी बातचीत के ज़रिये यह पड़ताल की जाए कि किस तरह पहचान और आत्मप्रदर्शन का यह तरीका आधुनिक समय के ‘छवि सुधार’ (image making) में शामिल हो गया है. वर्कशॉप में सार्वजनिक और निजी वक्तव्य में आये बदलाव और यादें-संजोने के नवीनतम तरीकों के बारे में भी बताया जायेगा.

इंडिया हैबिटैट सेंटर में होने वाली यह वर्कशॉप - दृश्यकला के प्रदर्शन पर गहन शोध और प्रकाशन करने वाले डिज़ाइनर, फिल्ममेकर मशहूर फोटोग्राफर पार्थिव शाह सम्हालेंगे. पार्थिव, सेंटर फॉर मीडिया एंड अल्टरनेटिव कम्युनिकेशन (सी-मैक) के संस्थापक-निदेशक हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन के पार्थिव शाह को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार से फोटोग्राफी की वरिष्ठ फैलोशिप, चार्ल्स वालेस फ़ेलोशिप, यू.के. और यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, यू.एस.ए. से फोटोग्राफी शिक्षा के लिए फल्बराईट लेक्चररशिप मिल चुकी है.

अगर आप को फोटोग्राफी पसंद है तो इंडिया हैबिटैट सेंटर के फोटोस्फीयर की इस वर्कशॉप में आपको शामिल होना चाहिए. रजिस्टर करने के लिए विसुअल आर्ट्स गैलरी को 011-43662024/25 पर कॉल कीजिये. कार्यशाला शनिवार 16 जुलाई 2016 को, एक्सपेरिमेंटल आर्ट्स गैलरी, इंडिया हैबिटैट सेंटर, नयी दिल्ली में, 11 बजे दिन से शाम 5 बजे तक चलेगी. छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों व आईएचसी के सदस्यों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 500/- व गैरसदस्यों के लिए 800/- है. साथ अपना मोबाईल या कोई कैमरा ले जाना नहीं भूलें.
००००००००००००००००
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
ईश्वर करे कोई लेखक न बने - प्रेम भारद्वाज | Prem Bhardwaj's Editorial
कहानी 'वो जो भी है, मुझे पसंद है' - स्वाति तिवारी | Hindi Kahani by Swati Tiwari
भवतु सब्ब मंगलं  — सत्येंद्र प्रताप सिंह | #विपश्यना
 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani
अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika
परिन्दों का लौटना: उर्मिला शिरीष की भावुक प्रेम कहानी 2025
बिहारियों का विस्थापन: ‘समय की रेत पर’ की कथा