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शब्दों का बहता दरिया : थिंग्स टू लीव बिहाइंड — उर्मिला गुप्ता

मई 12, 2017


शब्दों का बहता दरिया : थिंग्स टू लीव बिहाइंड  — उर्मिला गुप्ता

नमिता गोखले के उपन्यास 'थिंग्स टू लीव बिहाइंड' को पढ़ने के बाद  

 — उर्मिला गुप्ता की पाठकीय समीक्षा 


शब्दों का बहता दरिया है,
या भावों की ऊंची उड़ान,
इतिहास में दबी कल्पना है,
या यादों का संज्ञान

सिलसिलेवार ब्यौरा, वर्णनात्मक चरित्र चित्रण से सजा ये दमदार ऐतिहासिक उपन्यास – ए हिमालयन लव स्टोरी और द बुक ऑफ शेडोज  के बाद — हिमालयन त्रय-रचना की आखिरी कड़ी है। पहाड़ी गीतों, जंगली फूलों, वहां-के विश्वास (या अन्धविश्वास), दूर तक पसरी शांति और गुनगुनाती-सी हवा का सम्मिश्रण है 'थिंग्स टू लीव बिहाइंड' ।

ऐतिहासिक उपन्यास ऐसी श्रेणी है जिसे कामयाबी से निभा पाना अक्सर बेहतरीन लेखकों के भी बस में नहीं होता। नमिता गोखले इसे बड़ी सहजता और आत्मविश्वास से निभा ले जाती हैं।”  — रस्किन बॉण्ड

इसे पढ़ते हुए बार-बार ध्यान जाता है कि ये पढ़ा नहीं बल्कि सुना जा रहा है। अगर आपको कभी इसकी लेखिका नमिता गोखले को सुनने का मौका मिला हो तो आप जरूर मेरी बात से सहमत होंगे कि जो उनके बोलने का अंदाज है वही लिखने का भी।

नमिता गोखले

उनका लेखन उन्हीं के किरदार विलियम डेम्पस्टर के ब्रश स्ट्रोक की तरह शानदार है। जो पृष्ठभूमि उन्होंने एक बार अपने उपन्यास के लिए नियत कर दी, उसमें बेझिझक अपनी कथा, किरदारों और घटनाओं को विचरने का पूरा मौका दिया। ऐसा नहीं लगा कि उपन्यासकार ने उन्हें अपनी तरफ से कोई रफ़्तार दी हो, वो मानो खुद अपनी गति से विकसित हुए। खुद नमिता गोखले के शब्दों में, “कभी-कभी कुछ किरदार इतने जीवंत हो जाते हैं कि आप उन्हें फिक्शन का हिस्सा मानकर नहीं पढ़ सकते।

इसे नमिता गोखले की अब तक कि सर्वाधिक महत्वाकांक्षी रचना भी कहा जाए तो गलत नहीं होगा

1857 की बगावत से पहले की पृष्ठभूमि में लिखा उपन्यास उस दौर की बेचैनी को बखूबी साकार करता है। नैनी झील के पास पिछोड़ा ओढ़े खड़ी महिलायें सहसा आपकी नजरों के सामने आ खड़ी हो जाती हैं। उनकी पीठ आपकी तरफ होती है, और आप खुद को पहाड़ी से घिरी उस खूबसूरत झील के पास खड़ा पाते हैं। पहाड़ों की ठंडी हवा और उन महिलाओं के मनों में सुलगती चिंगारी बारी-बारी से आपको छूकर गुजरती है।  किताब के कवर पर बने अनार के चित्र की तरह ही इस अनार-रुपी उपन्यास में दानों के रूप में बहुत सी कहानियाँ, या यूं कहें कि जिंदगियां गुथी हुई हैं – इसमें तिलोत्तमा का हौंसला है तो देवकी के डायना और जयेश के जोनास बन जाने की मजबूरी भी। और विडंबना तो है कि देवकी डायना बनकर भी “डायना जोनास पंत” ही रह जाती है, पारम्परिक महिला की तरह अपने नाम के साथ पति का नाम और अपनी जाति (ब्राह्मण) को भी जोड़े रखते हुए। वो समय फिरंगी राज का था, जब माल रोड का ऊपरी हिस्सा (अंग्रेजों और उनके घोड़ों के लिए) और माल रोड का निचला हिस्सा (कुत्तों, नौकरों और दूसरे भारतीयों के लिए) हुआ करता था। इसकी मूल भावना है: प्यार, लालसा और साहस।

1840 से 1912 की कहानी कहता ‘थिंग्स टू लीव बिहाइंड’ ब्रिटिश भारतीय अतीत और उभरती हुई आधुनिकता की मिली-जुली विरासत है। अगर इसे नमिता गोखले की अब तक कि सर्वाधिक महत्वाकांक्षी रचना भी कहा जाए तो गलत नहीं होगा। उत्तराखंड की पृष्ठभूमि से आए, भारत के चहेते लेखक रस्किन बॉण्ड का उनके बारे में कहना है, “ऐतिहासिक उपन्यास ऐसी श्रेणी है जिसे कामयाबी से निभा पाना अक्सर बेहतरीन लेखकों के भी बस में नहीं होता। नमिता गोखले इसे बड़ी सहजता और आत्मविश्वास से निभा ले जाती हैं। अपनी हर किताब के साथ वो और निखरती जा रही हैं!”
Urmila Gupta

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
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