August 2014 - #Shabdankan
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साहित्यिक, सामाजिक ई-पत्रिका Shabdankan


आज के मीडिया में भाषा को लेकर ना तो सोच है, ना ही नीति, ना ही प्रेम और ना ही भावना - राहुल देव | Ratneshwar Singh's "Media Live" Launched

रविवार, अगस्त 31, 2014 0
टेलीविजन पत्रकारों ने खबरों को समझना बंद कर दिया है - शैलेश (न्यूज नेशन) मीडिया की भाषा- खतरे और चुनौतियां  के साहित्य अकादमी, नई द...
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राजेन्द्र यादव की कवितायेँ Poems of Rajendra Yadav

गुरुवार, अगस्त 28, 2014 0
राजेन्द्र यादव की कवितायेँ न-बोले क्षण न, कुछ न बोलो मौन पीने दो मुझे     अपनी हथेली से तुम्हारी उँगलियों का कम्प...     उँह, ...
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राजेन्द्र यादव को याद करती कविता - अंधेरी कोठरी मेँ रोशनदान की तरह | Kavita Remembers Rajendra Yadav

गुरुवार, अगस्त 28, 2014 1
अंधेरी कोठरी मेँ रोशनदान की तरह  कविता ‘हंस’ मेरा दूसरा मायका था आज राजेन्द्र जी पर जब लिखने बैठी हूँ, ऐन सुबह का वही समय है जब...
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राजेंद्र यादव: हमारे समय का कबीर - अनंत विजय | Anant Vijay Remembers Rajendra Yadav

गुरुवार, अगस्त 28, 2014 0
राजेंद्र यादव के जाने से साहित्य जगत में जो सन्नाटा पसरा है  वह हाल फिलहाल में टूटता नजर नहीं आ रहा है  - हमारे समय का कबीर - अन...
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हाथ से फिसलती ज़मीन... तेजेन्द्र शर्मा [हिंदी कहानी] Haath se fisalti zamin - Tejinder Sharma [Hindi Kahani]

सोमवार, अगस्त 25, 2014 0
हाथ से फिसलती ज़मीन... तेजेन्द्र शर्मा “ग्रैण्डपा, आपके हाथ इतने काले क्यों हैं?... आपका रंग मेरे जैसा सफ़ेद क्यों नहीं है?... आ...
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