आज के मीडिया में भाषा को लेकर ना तो सोच है, ना ही नीति, ना ही प्रेम और ना ही भावना - राहुल देव | Ratneshwar Singh's "Media Live" Launched

टेलीविजन पत्रकारों ने खबरों को समझना बंद कर दिया है - शैलेश (न्यूज नेशन)


मीडिया की भाषा- खतरे और चुनौतियां 

के साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के  सभागार में 30 अगस्त 2014 को मशहूर लेखक रत्नेशवर सिंह की किताब मीडिया लाइव का विमोचन किया गया ।

       रत्नेशवर सिंह ने अपने लेखकीय वक्तव्य में विस्तार से किताब की रचना प्रक्रिया के बारे में बताया । न्यूज नेशन के प्रधान संपादक शैलेश ने रत्नेश्वर की किताब को टेलीविजन पत्रकारिता करने की चाहत रहखनेवालों के लिए अहम करार दिया ।

       कलमकार फाउंडेशन के इस आयोजन में एक परिचर्चा भी हुई जिसका विषय था – मीडिया की भाषा- खतरे और चुनौतियां । शैलेश ने इस बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि आज अगर न्यूज चैनलों के लोगो हटा दिए जाएं तो सभी न्यूज चैनल एक जैसे दिखाई देते हैं क्योंकि सभी चैनलों में एक ही भाषा का इस्तेमाल किया जाता है । उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जाहिर किया कि टेलीविजन पत्रकारों ने खबरों को समझना बंद कर दिया है । वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने रत्नेशवर की किताब को रोचक, महत्वपूर्ण और तथ्यपूर्ण करार दिया और कहा कि इसको पढ़ते समय संवाद, दृष्य और घटनाएं सजीव प्रभाव पैदा करती है । उन्होंने परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए बेहद आक्रामक तरीके से खबरिया चैनलों की भाषा को कठघरे में खड़ा किया । उन्होंने कहा कि आज के मीडिया में भाषा को लेकर ना तो सोच है, ना ही नीति. ना ही प्रेम और ना ही भावना । राहुल देव ने इस स्थिति पर गंभीर चिंतन की मांग की । उन्होंने मीडिया पर हिंदी के माध्यम से अंग्रेजी की नर्सरी चलाने का आरोप भी लगाया । चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए शैलेश ने कहा कि चीन के अखबारों ने सबसे पहले अपने यहां रोमन में लिखना शुरु किया । उसी तरह से उन्होंने राहुल देव की इस बात का जमकर प्रतिवाद किया कि हिंदी को छोड़कर कोई भी अन्य भारतीय भाषा अंग्रेजी का इस्तेमाल नहीं करती है । शैलेश के मुताबिक बांग्ला चैनलों में हिंदी चैनलों से ज्यादा अंग्रेजी के शब्दों का इस्तेमाल होता है । इस मौके पर बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार संजय कुंदन ने कहा कि इस आरोप पर गंभीरता से विचार करना होगा कि मीडिया सच दिखा नहीं रहा है बल्कि सच बना रहा है । वर्तिका नंदा ने चर्चा की शुरुआत की ।

       इस मौके पर भारत सरकार में संयुक्त सचिव और लेखक प्रेमपाल शर्मा ने भी अपनी बात रखी । कलमकार फाऊंडेशन द्वारा आयोजित इस रोचक परिचर्चा में न्यूज नेशन के प्रधान संपादक शैलेश, वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव, मीडिया विश्लेषक आनंद प्रधान और वर्तिका नंदा के अलावा स्तंभकार अनंत विजय, अरविंद मोहन और प्रेमपाल शर्मा समेत राजधानी के कई नामचीन पत्रकार, लेखक और बुद्धिजीवी मौजूद थे । 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
हिन्दी कहानी 'अज़ाब' - विजयश्री तनवीर | Vijayshree Tanveer - Hindi Story - Azab
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
पानियों पर लिखे बेवतन लोगों के अफ़साने — कहानी — मधु कंकरिया | Hindi Story on Stranded Pakistanis by Madhu Kankaria
जयश्री रॉय और प्रमोद राय को 'राजेंद्र यादव हंस कथा सम्मान' 2020-21
हिलाल अहमद 'आतिफ' की दस कविताएं | भाषा, समय, संवेदनाओं की हिंदी कविताएँ | शब्दांकन
परिन्दों का लौटना: उर्मिला शिरीष की भावुक प्रेम कहानी 2025
Hindi Story: 'शतरंज के खिलाड़ी' — मुंशी प्रेमचंद की हिन्दी कहानी