March 2018 - #Shabdankan
#Shabdankan

साहित्यिक, सामाजिक ई-पत्रिका Shabdankan


अमर उजाला शब्द सम्मान #ShabdSamman | #Shabdankan #Hindi #Award

Friday, March 30, 2018 1
शब्द होंगे सम्मानित नई दिल्ली । साहित्य के सम्मान के लिए अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए समाचार पत्र अमर उजाला इस साल से साहित...
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आकांक्षा पारे की कहानी 'मणिकर्णिका' #Hindi #Shabdankan

Thursday, March 29, 2018 1
दूर से नीले रंग की बस ऐसे चली आ रही थी जैसे अगर एक्सीलेटर से पैर हटा तो चालान कट जाएगा। सड़क पर खड़े लोग तितर-बितर हो गए। बस ने चीख...
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अबकी बार बेदिल सरकार | मंत्रियों के विभाग और मंत्रियों की प्राथमिकता — अभिसार शर्मा #CBSE

Wednesday, March 28, 2018 3
बच्चे रो रहे हैं...उनकी मेहनत और प्लानिंग बर्बाद हो गई, मगर ये नाकारा सरकार हमें लोगों को बांटने वाली सियासत के रास्ते पर चलाना चाहती ...
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मुकेश पोपली की कविताएं

Sunday, March 25, 2018 2
सुनो राजा: एक सुनो राजा तुम ही थे जो उछल-उछल कर पहुंच जाते थे सबसे ऊपर वाली सीढ़ी पर चिढ़ाते थे सबको यह कहकर तुम सब हार गए ...
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एक से पांच कविता: दोपहर तीन बजे - प्रकाश के रे

Sunday, March 25, 2018 1
Hindi Poems - Prakash K Ray एक: आँखों से बही थी कविता  सर्वप्रथम  क़स्बे के अख़बार के आख़िरी अंक में  बतौर संपादक...
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स्वाति श्वेता की कहानी "कैरेक्टर सर्टिफिकेट"

Saturday, March 24, 2018 4
“अरे मेहरा जी, दस साल से मैं रीडर हूँ । अभी तक प्रोफेसर नहीं बना । पन्द्रह साल सहायक प्रवक्ता रहा हूँ और यह सुनिधि बारह वर्षों में ही...
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उस्तादों का अपना उत्सव: श्रीराम शंकरलाल संगीत उत्सव — भरत तिवारी

Thursday, March 22, 2018 0
प्रभात ख़बर : लिंक  http://epaper.prabhatkhabar.com/1583315/KOLKATA-City/kol-city#page/8/2 प्रभात खबर: शास्त्रीय संगीत — भरत त...
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दस विदेशी कवितायेँ : प्रकाश के रे | #WorldPoetryDay @pkray11 ‏

Wednesday, March 21, 2018 0
कविता का विश्व  — प्रकाश के रे विश्व कविता दिवस के अवसर पर प्रस्तुत हैं विभिन्न भाषाओं के महान कवियों की कुछ रचनाओं के अनुवाद...
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आप ललना का पलना झुलाइए — रवीश कुमार #RavishKumar

Tuesday, March 20, 2018 1
आकाश में झूठ की धूल — रवीश कुमार  रवीश कुमार, मीडियाकर्मी और लेखक। एनडीटीवी-इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी सम्पादक। क्या हम...
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रुचि भल्ला की कवितायेँ और अनुप्रिया के चित्र

Monday, March 19, 2018 3
रुचि भल्ला रचना का जीवंत होना ज़रूरी है. रचनाकार उसे जन्म देता है और उसे ही यह देखना होता है कि उसकी कृति, कवि की कविता, लोगों से ...
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