पद्मजा की डायरी ‘मैं कोई और’ को स्वयं प्रकाश स्मृति सम्मान

पद्मजा — मैं कोई और की लेखिका
पद्मजा

25 सितम्बर 2026, दिल्ली। साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत संस्थान ‘स्वयं प्रकाश स्मृति न्यास’ ने सुप्रसिद्ध साहित्यकार स्वयं प्रकाश की स्मृति में दिए जाने वाले वार्षिक सम्मान की घोषणा कर दी है।

न्यास द्वारा जारी विज्ञप्ति में न्यास के अध्यक्ष डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर का यह सम्मान इस बार कथेतर विधा के लिए युवा लेखिका पद्मजा की डायरी ‘मैं कोई और’ को दिया जाएगा।

सम्मान के लिए गठित तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल ने सर्वसम्मति से इस डायरी को वर्ष 2026 के लिए चयनित करने की अनुशंसा की है।

‘मैं कोई और’ : जिजीविषा और संघर्ष की कहानी

निर्णायक मंडल के अध्यक्ष प्रसिद्ध आलोचक संजीव कुमार (दिल्ली) ने अपनी संस्तुति में कहा:

“पद्मजा की डायरी ‘मैं कोई और’ जिजीविषा और संघर्ष की अनोखी कहानी है। एक उपचार के दौरान लिखने और बोलने की क्षमता से वंचित हो जाने के बाद उसे फिर से हासिल करने की कहानी, जो इस नवार्जित दक्षता के किंचित अनगढ़पन के साथ ही बयान कर दी गई है। वह अनगढ़पन भी वस्तु का अनुसरण करने वाली शैली और शिल्प का उदाहरण बन गया है। निस्संदेह, पिछले चार सालों में प्रकाशित कथेतर साहित्य में पद्मजा की यह किताब विशिष्ट स्थान रखती है।”

निर्णायक मंडल की वरिष्ठ सदस्य, कवि और साहित्यकार शांति नायर (कालड़ी) ने अपनी संस्तुति में कहा:

“जीवन के संघर्ष, आत्मपहचान और अदम्य जिजीविषा के एक मार्मिक दस्तावेज़ के रूप में पद्मजा की पुस्तक ‘मैं कोई और’ पाठकों के समक्ष आती है। दीर्घकालीन रोगावस्था तथा मस्तिष्क-शल्यक्रियाओं की शृंखला से गुज़रने के बाद संपूर्ण स्मृतिभ्रंश और फिर अनंतर अपनी खोई हुई स्मृति, भाषा और दैनिक जीवन की क्षमताओं को पुनः अर्जित करने का अनुभव, जो इस पुस्तक में लिपिबद्ध हुआ है, वह असाधारण है।”

निर्णायक मंडल के तीसरे सदस्य आलोचक पल्लव (दिल्ली) ने कहा:

“अपनी पहली ही प्रकाशित कृति से पद्मजा ने बताया है कि निजी अनुभवों की सादगी और मार्मिकता के साथ कैसे रचा जा सकता है। निस्संदेह ऐसी कृतियों से कथेतर लेखन को हमारे समय का प्रतिनिधि रचना-माध्यम माना जा सकेगा। पद्मजा जैसे युवा लेखक अनुभवों के उद्घाटन के लिए प्रचलित रूपबंधों को छोड़कर डायरी जैसी विधा को अपना रहे हैं, जो निश्चय ही कथेतर की महत्ता को दर्शाता है।”

मूलतः जयपुर निवासी पद्मजा बाल साहित्य और फिल्म के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उनकी यह डायरी वर्ष 2025 में प्रकाशित हुई थी।

स्वयं प्रकाश की स्मृति में सम्मान

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि मूलतः राजस्थान के अजमेर निवासी स्वयं प्रकाश हिंदी कथा साहित्य के क्षेत्र में अपने मौलिक योगदान के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने ढाई सौ के आसपास कहानियाँ लिखीं और उनके पाँच उपन्यास भी प्रकाशित हुए। इनके अतिरिक्त नाटक, रेखाचित्र, संस्मरण, निबंध और बाल साहित्य में भी अपने अवदान के लिए स्वयं प्रकाश को हिंदी संसार में जाना जाता है।

उन्हें भारत सरकार की साहित्य अकादेमी सहित देश भर की विभिन्न अकादमियों और संस्थाओं से अनेक पुरस्कार और सम्मान मिले थे। उनके लेखन पर अनेक विश्वविद्यालयों में शोध कार्य हुआ है तथा उनके साहित्य के मूल्यांकन की दृष्टि से अनेक पत्रिकाओं ने विशेषांक भी प्रकाशित किए हैं।

20 जनवरी 1947 को अपने ननिहाल इंदौर में जन्मे स्वयं प्रकाश का निधन कैंसर के कारण 7 दिसम्बर 2019 को हो गया था। लंबे समय से वे भोपाल में निवास कर रहे थे और यहाँ से निकलने वाली पत्रिकाओं ‘वसुधा’ तथा ‘चकमक’ के संपादन से भी जुड़े रहे।

फरवरी में होगा सम्मान समारोह

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि फरवरी में आयोजित होने वाले समारोह में लेखिका पद्मजा को सम्मानस्वरूप ग्यारह हजार रुपये, प्रशस्ति-पत्र और शॉल भेंट किए जाएंगे।

साहित्य और लोकतांत्रिक विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए गठित स्वयं प्रकाश स्मृति न्यास में कवि राजेश जोशी (भोपाल), आलोचक दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (जयपुर), कवि-आलोचक आशीष त्रिपाठी (बनारस), आलोचक पल्लव (दिल्ली), इंजीनियर अंकिता सावंत (मुंबई) और अपूर्वा माथुर (दिल्ली) सदस्य हैं।


पल्लव
सचिव
स्वयं प्रकाश स्मृति न्यास
393, कनिष्क अपार्टमेंट
ब्लॉक सी एंड डी, शालीमार बाग
दिल्ली - 110088
WhatsApp: 08130072004


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