मंगलवार, अगस्त 15, 2017

'वंदेमातरम्' मोगुबाई कुरदीकर और विद्या शाह का गायन #VandeMataram



वन्दे मातरम

मोगुबाई कुरदीकर और विद्या शाह


मोगुबाई कुरदीकर:: ग्रामोफ़ोन के समय में महिलाओं ने भारतीय कला, संगीत और साहित्य की क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और थिएटर व फ़िल्म से जुड़ी रहीं. और इसके बाद उनका ‘प्रदर्शन संगीत’ पर गहरा प्रभाव रहा. दुखद बाद यह है उन ‘गानेवालियों’ यानी गायिकाओं के विषय में हमें न के बराबर याद रहा. इस विरासत यदि कहीं संरक्षित रही तो वह बीसवीं सदी के पहले दशक में आने वाले ग्रामोफ़ोन रिकार्ड्स हैं. संग्रहकर्ताओं के हिसाब से भारत में निकलने वाले ग्रामोफ़ोन रिकार्ड्स की संख्या कोई पांच लाख रही होगी —  इसका बड़ा संकाय आज-के श्रोताओं की पहुँच से परे है.



ठीक इसी वक़्त राष्ट्रवादी आंदोलन भी चल रहा था - सुधारवादी नजरिए के साथ विदेशी शासन के खिलाफ आंदोलन... दरकिनार किये जाने की शुरुआत होने के बाद भी, बाई जी साहब ने राष्ट्रीय आन्दोलन में आर्थिक सहयोग, देशभक्ति के गानों की रिकॉर्डिंग और अनेक दफ़ा गानों का अंत ‘वन्दे मातरम’ बोल के किया और आन्दोलन का हिस्सा बनी रहीं.




Vidya Shah rendering Vande Mataram (based on the original rendition on Record by the legendary Mogubai Kurdikar set in raag Khambavati) 






Women on Record


Mogubai Kurdikar :: Women in the gramophone era made a significant contribution to Indian art, music and literature, and were involved in theatre and films. They have had a profound influence on subsequent performance music. Ironically, there is little available in public memory about Gaanewalis or songstresses; this is legacy that has largely been preserved through the gramophone records that first made their appearance in Indian in first decade of the 20th century. Collectors estimate that the number of records issued in India would amount to about half a million – a large corpus of which remains unheard and inaccessible to contemporary audiences.




This was also the time of the nationalist movement – a struggle against foreign rule, but also a movement with reformist agenda. Even though a process of marginalization has set in, the Bai ji’s contributed to the national movement with financial support, recording patriotic songs or even in some cases ending their concert with Vande Matram!

http://www.womenonrecord.com/




(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
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