आगे-आगे पढिये छपना है क्या ... - #Shabdankan
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आगे-आगे पढिये छपना है क्या ...

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* इसके  अलावा 

कहानी

डॉ बच्चन पाठक 'सलिल ' - न्याय की तुला
तेजेंद्र शर्मा - तरकीब
ज़किया ज़ुबैरी - बस एक कदम
नीना पॉल - आख़री गीत
विजय कुमार- चमनलाल की मौत

शख्सियत

"मख्दूम" मेहनतकशो का चहेता शायर - सुनील दत्ता

पर्व 

भगोरिया पर्व - संजय वर्मा "दृष्टी"

पत्र-पत्रिका-प्रकाशक

निकट

कृष्ण बिहारी- लिखने से मुझे वह मिलता है जो आपको कभी नहीं मिला

प्रतिमान/वाणी प्रकाशन

अभय दूबे - क्या हमारे मगध की मौलिकता में कुछ कमी है ?


लेख

महेश चन्द्र त्रिपाठी - लाठी और लेखनी
डा. नीरज भारद्वाज - बदलता मीडिया तंत्र
पंकज चतुर्वेदी - तो क्या हमारे पास जमीन की कमी है ?

व्यंग्य कहानी 

सुशील सिद्धार्थ - दरियागंज में बैल
दिलीप तेतरवे - सत्यव्रत

कविता

लालित्य "ललित" *
दिलीप तेतरवे
संतोष कुमार पांडे (सारंगपाणि)
वत्सला पांडेय
रविश 'रवि'
सुधीर कुमार सोनी
पूनम शुक्ला

लघु कविताये

शैलेन्द्र कुमार सिंह

लघुकथाएं

डॉ० रश्मि, रचना आभा
    रचनाओं का स्वागत है, रचनायें sampadak@shabdankan.com पर भेजें      

1 comment:

  1. क्या बात है। क्या कहने ..आनंद आ गया।

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